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Mohit Subran
hai safar ruka hua hayaat bhi ruki hui
hai safar ruka hua hayaat bhi ruki hui | है सफ़र रुका हुआ हयात भी रुकी हुई
- Mohit Subran
है
सफ़र
रुका
हुआ
हयात
भी
रुकी
हुई
रास्ता
नया
खुले
तो
चल
पड़े
हयात
फिर
- Mohit Subran
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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डर
हम
को
भी
लगता
है
रस्ते
के
सन्नाटे
से
लेकिन
एक
सफ़र
पर
ऐ
दिल
अब
जाना
तो
होगा
Javed Akhtar
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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दामन
झटक
के
वादी-ए-ग़म
से
गुज़र
गया
उठ
उठ
के
देखती
रही
गर्द-ए-सफ़र
मुझे
Ali Sardar Jafri
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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जिस
दौर
से
माज़ी
मिरा
गुज़रा
है
ना
उस
दौर
से
अच्छा
है
ये
तन्हा
सफ़र
Bhoomi Srivastava
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इस
तरह
करता
है
हर
शख़्स
सफ़र
अपना
ख़त्म
ख़ुद
को
तस्वीर
में
रखता
है
चला
जाता
है
Sandeep kumar
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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बाग़-ए-बहिश्त
से
मुझे
हुक्म-ए-सफ़र
दिया
था
क्यूँँ
कार-ए-जहाँ
दराज़
है
अब
मिरा
इंतिज़ार
कर
Allama Iqbal
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कोई
तो
बात
उस
जहाँ
में
है
जो
गया
लौट
के
नहीं
आया
Mohit Subran
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ज्यूँँ
यादों
में
वो
आते
हैं
त्यूँँ
पलकों
से
गिर
जाते
हैं
मेरे
ही
बोए
आँसू
हैं
हर
शब
जो
ये
उग
आते
हैं
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Mohit Subran
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जिसे
मैं
जानता
हूँ
पहले
से
उस
से
नहीं
जुड़ना
नए
रस्ते
का
तालिब
हूँ
पुराने
पे
नहीं
मुड़ना
Mohit Subran
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हौले-हौले
गुज़र
रहा
हूँ
मैं
वक़्त
से
पहले
मर
रहा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
बस
बसर
की
हो
जिसने
एक
ऐसा
बशर
रहा
हूँ
मैं
फिर
वो
कोई
भी
शख़्स
क्यूँ
न
सही
हर
किसी
को
अखर
रहा
हूँ
मैं
जाने
क्या
सूझी
है
जो
शिद्दत
से
ख़ुद
को
बर्बाद
कर
रहा
हूँ
हाए
ये
सच
वहाँ
तबाही
रही
आज
तक
भी
जिधर
रहा
हूँ
मैं
न
गिनूँ
इस
जहान
को
फिर
तो
हर
जगह
कार-गर
रहा
हूँ
मैं
आख़िरश
क्या
है
वो
जो
खोया
नहीं
फिर
ये
किस
डर
से
डर
रहा
हूँ
मैं
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Mohit Subran
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जा
चुका
है
बता
के
वो
अपना
रह
गया
बाक़ी
हिस्सा
हमारा
और
हम
कुछ
नहीं
चाहते
हैं
कोई
बस
सुन
ले
क़िस्सा
हमारा
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Mohit Subran
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