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Mohit Subran
bachi hai zindagi men jo bhi raushni us pe
bachi hai zindagi men jo bhi raushni us pe | बची है ज़िन्दगी में जो भी रौशनी उस पे
- Mohit Subran
बची
है
ज़िन्दगी
में
जो
भी
रौशनी
उस
पे
गड़ाए
बैठी
है
नज़रों
को
तीरगी
अपनी
- Mohit Subran
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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प्यार
की
रात
हो
छत
पर
हो
तेरा
साथ
तो
फिर
चाँद
को
बीच
में
डाला
नहीं
जाता
मुझ
सेे
Waseem Barelvi
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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अँधेरा
खो
गया
है
गाँव
वालों
सवेरा
हो
गया
है
गाँव
वालों
तुम्हें
अब
जागना
ख़ुद
ही
पड़ेगा
ये
मुर्गा
सो
गया
है
गाँव
वालों
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Divy Kamaldhwaj
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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जैसे
कोई
रोता
है
गले
प्यार
से
लग
कर
कल
रात
मैं
रोया
तेरी
दीवार
से
लग
कर
Aziz Ejaaz
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चूँकि
रोना
बहाल
रहता
है
ख़ुश्क
आँखों
का
हाल
रहता
है
नींद
आँखों
से
क्यूँँ
गुरेज़ा
है
रात
भर
ये
सवाल
रहता
है
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Sumit Panchal
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आज
सड़कों
पर
लिखे
हैं
सैकड़ों
नारे
न
देख
पर
अँधेरा
देख
तू
आकाश
के
तारे
न
देख
Dushyant Kumar
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गुज़ार
लेते
हैं
जैसे
भी
आप
दिन
लेकिन
ये
हम
ही
जानते
हैं
रात
कैसे
कटती
है
Mohit Subran
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न
कोई
घर
न
कोई
शख़्स
कुछ
भी
तो
नहीं
बचता
हवा
जब
आग
भर
के
मुँह
में
बस्ती
से
गुज़रती
है
Mohit Subran
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तमाम
ज़िन्दगी
ये
बात
मैं
न
भूलूँगा
किसी
ने
याद
न
रक्खा
ये
याद
रक्खूँगा
Mohit Subran
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जिरह
जब-जब
हुई
इतिहास
को
लेकर
बदल
तब-तब
गया
भूगोल
दुनिया
का
Mohit Subran
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वक़्त
ने
छोड़ा
न
इक
हाथ
भी
इन
हाथों
में
ज़िन्दगी
तुझ
को
गुज़ारूँ
तो
गुज़ारूँ
कैसे
Mohit Subran
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