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Mohit Subran
ameer ho ga.e sab doston ke haath magar
ameer ho ga.e sab doston ke haath magar | अमीर हो गए सब दोस्तों के हाथ मगर
- Mohit Subran
अमीर
हो
गए
सब
दोस्तों
के
हाथ
मगर
मिरे
ये
पाँव
फँसे
अब
भी
ग़ुर्बतों
में
हैं
- Mohit Subran
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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हमें
दीदार
से
मरहूम
रखकर
है
नज़र
दिल
पर
पराया
माल
ताको
और
दौलत
अपनी
रहने
दो
Dagh Dehlvi
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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दिल-लगी
में
हसरत-ए-दिल
कुछ
निकल
जाती
तो
है
बोसे
ले
लेते
हैं
हम
दो-चार
हँसते
बोलते
Munshi Amirullah Tasleem
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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इक
शहंशाह
ने
दौलत
का
सहारा
ले
कर
हम
ग़रीबों
की
मोहब्बत
का
उड़ाया
है
मज़ाक़
Sahir Ludhianvi
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न
जाने
कौन
सी
दौलत
अता
करता
है
रब
इनको
किसी
भी
बाप
को
मुफ़्लिस
कभी
देखा
नहीं
मैंने
Saheb Shrey
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अब
मैं
समझा
तिरे
रुख़्सार
पे
तिल
का
मतलब
दौलत-ए-हुस्न
पे
दरबान
बिठा
रक्खा
है
Qamar Moradabadi
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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ना-कामयाबी
हाथ
से
सब
छीन
लेती
है
इक
दोस्त
तक
नहीं
भला
हिस्से
में
छोड़ती
Mohit Subran
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ख़ुदस
नहीं
झुकती
है
अगर
ख़ुदस
झुका
दो
नाकाम
ये
सरकार,
ये
सरकार
गिरा
दो
Mohit Subran
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मैं
ख़ुद
को
ढाल
नहीं
पाया
ढंग
में
इस
के
ये
दुनिया
वक़्त
से
कुछ
मेरे
आगे
की
निकली
Mohit Subran
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किस
को
हैं
फ़ुर्सतें
कि
किसी
की
ख़ुशी
चुभे
सब
अपने-अपने
दुख
में
ही
मसरूफ़
हैं
यहाँ
Mohit Subran
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निकाला
बीच
से
जा
सकता
था
उस
बात
को
लेकिन
ग़लत-फ़हमी
बढ़ी
इतनी
दिलों
को
शक
से
भर
डाला
बहुत
छोटी
सी
कोई
बात
थी
जिस
पे
लड़े
थे
हम
मगर
उस
बात
ने
ही
दरमियाँ
सब
ख़त्म
कर
डाला
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Mohit Subran
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