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Ammar 'yasir'
tum jo the uske vo mohre rahna
tum jo the uske vo mohre rahna | तुम जो थे उसके वो मोहरे रहना
- Ammar 'yasir'
तुम
जो
थे
उसके
वो
मोहरे
रहना
उसके
कहने
पर
तुम
चलते
रहना
उसने
थामा
औरों
के
हाथों
को
तुम
अपने
हाथों
को
मलते
रहना
सब
दुनिया
को
पाने
को
चल
निकले
तुम
इस
कमरे
में
ही
जलते
रहना
उसको
पाना
और
मसअला
है
लेकिन
ये
बस
में
है
उसको
तकते
रहना
यासिर
मेरी
एक
ही
ख़्वाहिश
है
अब
बस
उसकी
बाहों
में
सोते
रहना
- Ammar 'yasir'
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हम
से
तू
पूछ
कि
क्या
खोया
है
हम
ने
पाया
जो
वही
बोया
है
एक
मुद्दत
से
नहीं
सोया
वो
जो
खुली
आँख
से
यूँँ
सोया
है
सारे
ग़म
ख़त्म
हुए
हैं
उसके
आज
जी
भर
के
वो
जब
रोया
है
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एक
ज़ख़्म
जिसकी
अब
दु'आ
नहीं
तेरे
जैसा
कोई
भी
मिला
नहीं
दूरियों
के
बावजूद
ख़ुश
हूँ
मैं
अब
किसी
से
कोई
भी
गिला
नहीं
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दूर
जाने
का
डर
सता
रहा
है
तेरे
इतने
क़रीब
होने
से
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तेरी
मुझ
पर
पड़ी
नज़र
जब
से
मुझ
को
कुछ
भी
ख़बर
नहीं
तब
से
मैं
यहाँ
लड़
रहा
था
ख़ुद
ही
से
मैं
हुआ
कैसे
तेरा
और
कब
से
खोया
मैं
एक
ख़्वाब
में
कुछ
यूँँ
फिर
न
सोया
मैं
कुछ
गई
शब
से
माँ
की
इज़्ज़त
ये
हुक्म
है
हम
को
हम
ने
सीखा
ये
एक
मकतब
से
ये
उसे
देख
के
पता
चला
है
वो
नहीं
है
किसी
भी
मज़हब
से
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अब
नहीं
है
याद
उसको
नाम
हमारा
करता
था
दिल
से
जो
एहतिराम
हमारा
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