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Ammar 'yasir'
teri mujh par padi nazar jab se
teri mujh par padi nazar jab se | तेरी मुझ पर पड़ी नज़र जब से
- Ammar 'yasir'
तेरी
मुझ
पर
पड़ी
नज़र
जब
से
मुझ
को
कुछ
भी
ख़बर
नहीं
तब
से
मैं
यहाँ
लड़
रहा
था
ख़ुद
ही
से
मैं
हुआ
कैसे
तेरा
और
कब
से
खोया
मैं
एक
ख़्वाब
में
कुछ
यूँँ
फिर
न
सोया
मैं
कुछ
गई
शब
से
माँ
की
इज़्ज़त
ये
हुक्म
है
हम
को
हम
ने
सीखा
ये
एक
मकतब
से
ये
उसे
देख
के
पता
चला
है
वो
नहीं
है
किसी
भी
मज़हब
से
- Ammar 'yasir'
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इतना
प्यार
में
शर्मिंदा
हुआ
है
अब
तू
शर्म
से
मर
क्यूँ
नहीं
जाता
Ammar 'yasir'
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हम
से
तू
पूछ
कि
क्या
खोया
है
हम
ने
पाया
जो
वही
बोया
है
एक
मुद्दत
से
नहीं
सोया
वो
जो
खुली
आँख
से
यूँँ
सोया
है
सारे
ग़म
ख़त्म
हुए
हैं
उसके
आज
जी
भर
के
वो
जब
रोया
है
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Ammar 'yasir'
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लड़कियों
का
ये
दीन
अब
का
नहीं
अब
कोई
बिगड़ा
बकरा
मारना
है
Ammar 'yasir'
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इक
नया
साथी
मिल
गया
है
मुझे
फिर
भी
वो
ग़म
सता
रहा
है
मुझे
उसको
हूँ
खोने
में
लगा
मैं
मगर
फिर
भी
अंदर
मेरे
मिला
है
मुझे
उसने
तो
चोर
ही
दिया
है
मगर
उसके
आने
की
आशना
है
मुझे
मुझ
को
अब
आइने
का
क्या
करना
उसकी
आँखें
ही
आइना
है
मुझे
उसको
छुप
कर
के
देखता
हूँ
मैं
वो
कि
चुप
के
से
देखता
है
मुझे
मैं
अकेले
में
सोचता
हूँ
ये
क्या
कभी
तू
भी
सोचता
है
मुझे
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Ammar 'yasir'
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ऐ
ख़ुदा
मुझ
को
ये
हुआ
क्या
है
उसका
हूँ
मैं
तो
फिर
बुरा
क्या
है
प्यार
मिलता
है
प्यार
के
बदले
मुझ
को
बदले
में
ये
मिला
क्या
है
मयकदों
में
गया
बहुत
लेकिन
उसकी
आँखों
का
ये
नशा
क्या
है
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