tu naye kisi dar kyuuñ nahin jaata | तू नए किसी दर क्यूँ नहीं जाता

  - Ammar 'yasir'
तूनएकिसीदरक्यूँनहींजाता
तेराख़्वाबबिखरक्यूँनहींजाता
इतनाप्यारमेंशर्मिंदाहुआहै
अबतूशर्मसेमरक्यूँनहींजाता
उसकीयादमेंक्यूँऐसेरहूँमैं
ज़ख़्मउसकायेभरक्यूँनहींजाता
बारबारवोइकहीगलीजाना
तूअभीभीसुधरक्यूँनहींजाता
कैसेउसकीकिसीयादसेनिकलूँ
उसकामुझसेअसरक्यूँनहींजाता
कैसीइकबुरीनागिनथीवोहाए
ज़हरउसकाउतरक्यूँनहींजाता
ईदकोअभीयासिरहैसमयकुछ
छतसेचाँदमगरक्यूँनहींजाता
  - Ammar 'yasir'
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