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Ammar 'yasir'
saath mere uskaa saaya rah gaya
saath mere uskaa saaya rah gaya | साथ मेरे उसका साया रह गया
- Ammar 'yasir'
साथ
मेरे
उसका
साया
रह
गया
प्यार
अब
ये
मेरा
आधा
रह
गया
हो
के
अब
वो
और
किसी
का
रह
गया
मैं
यहाँ
पर
ज़िंदा
मरता
रह
गया
उसको
मैं
हर
ख़्वाब
में
देखूँ
यहाँ
ख़्वाब
ये
मेरा
अधूरा
रह
गया
सुब्ह
वो
आराम
से
था
सो
गया
रात
भर
को
जो
वो
रोता
रह
गया
उसने
सब
किरनें
बुझा
दी
हैं
मगर
बस
यहाँ
पर
एक
दीया
रह
गया
तुम
मिलो
करनी
है
तुम
से
बात
कुछ
मामला
कुछ
था
पुराना
रह
गया
उसकी
मजबूरी
थी
उसने
ये
कहा
और
मैं
हाँ
हाँ
जी
करता
रह
गया
उसको
शायद
मिल
गया
कोई
मगर
मैं
उसे
आवाज़
देता
रह
गया
ख़ुद
को
आईने
में
देखूँ
कैसे
अब
मैं
था
क्या
'यासिर'
मगर
क्या
रह
गया
- Ammar 'yasir'
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इतना
प्यार
में
शर्मिंदा
हुआ
है
अब
तू
शर्म
से
मर
क्यूँ
नहीं
जाता
Ammar 'yasir'
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एक
ज़ख़्म
जिसकी
अब
दु'आ
नहीं
तेरे
जैसा
कोई
भी
मिला
नहीं
दूरियों
के
बावजूद
ख़ुश
हूँ
मैं
अब
किसी
से
कोई
भी
गिला
नहीं
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Ammar 'yasir'
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समझ
आया
ये
फ़लसफ़ा
अब
मुझे
नहीं
जुड़ता
कुछ
टूट
जाने
के
बाद
Ammar 'yasir'
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मैंने
माना
वो
मेरा
कुछ
भी
नहीं
हाँ
मगर
इस
में
बुरा
कुछ
भी
नहीं
मेरे
आगे
से
वो
कुछ
ऐसे
गया
मैं
तो
जैसे
उसका
था
कुछ
भी
नहीं
उस
पे
सब
अपना
लुटा
कर
और
फिर
मुझ
को
बदले
में
मिला
कुछ
भी
नहीं
रात
भर
को
जागने
के
बाद
मैं
यूँँ
उठा
जैसे
हुआ
कुछ
भी
नहीं
देख
मुझ
को
तेरे
आगे
बैठा
हूँ
तुझ
से
जानाँ
अब
छुपा
कुछ
भी
नहीं
जिस
को
चाहूँ
छोड़
जाता
है
मुझे
इस
में
अब
'यासिर'
नया
कुछ
भी
नहीं
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Ammar 'yasir'
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काश
तू
इस
से
पहले
मर
जाता
'यासिर'
उसकी
मेहंदी
पे
नाम
है
और
किसी
का
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