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Ammar 'yasir'
Kaise tu is dil ke andar aayee thi
कैसे तू इस दिल के अंदर आई थी
- Ammar 'yasir'
कैसे
तू
इस
दिल
के
अंदर
आई
थी
सब
को
पीछे
छोड़
फर
फर
आई
थी
एक
दिन
शर्मा
गया
था
चाँद
जब
खोल
के
ज़ुल्फ़ें
वो
छत
पर
आई
थी
याद
है
वो
दिन
अभी
भी
मुझ
को
जब
साथ
मेरे
वो
मेरे
घर
आई
थी
मैंने
बोला
मिलना
है
तुम
से
मुझे
फिर
वो
घर
से
अपने
चुप
कर
आई
थी
मैं
बिछड़
के
ठीक
हूँ
तुझ
से
मगर
याद
तू
भी
मुझ
को
अक्सर
आई
थी
- Ammar 'yasir'
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तुम
जो
थे
उसके
वो
मोहरे
रहना
उसके
कहने
पर
तुम
चलते
रहना
उसने
थामा
औरों
के
हाथों
को
तुम
अपने
हाथों
को
मलते
रहना
सब
दुनिया
को
पाने
को
चल
निकले
तुम
इस
कमरे
में
ही
जलते
रहना
उसको
पाना
और
मसअला
है
लेकिन
ये
बस
में
है
उसको
तकते
रहना
यासिर
मेरी
एक
ही
ख़्वाहिश
है
अब
बस
उसकी
बाहों
में
सोते
रहना
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पहले
क्यूँ
इतनी
सारी
मेहनत
करते
हो
और
फिर
यूँँ
हाए
मेरी
क़िस्मत
करते
हो
शायद
फिर
मिल
न
पाओ
उस
से
तुम
यासिर
कह
दो
उसको
उसे
मोहब्बत
करते
हो
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Ammar 'yasir'
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हम
से
तू
पूछ
कि
क्या
खोया
है
हम
ने
पाया
जो
वही
बोया
है
एक
मुद्दत
से
नहीं
सोया
वो
जो
खुली
आँख
से
यूँँ
सोया
है
सारे
ग़म
ख़त्म
हुए
हैं
उसके
आज
जी
भर
के
वो
जब
रोया
है
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तेरी
आँखों
में
मैं
खोना
चाहता
हूँ
मैं
तेरा
ही
अब
से
होना
चाहता
हूँ
तू
मुझे
अब
पास
तो
अपने
बुला
ले
मैं
तेरी
बाँहों
में
सोना
चाहता
हूँ
मैं
हँसा
इतना
जो
सबके
सामने
सो
अब
अकेले
थोड़ा
रोना
चाहता
हूँ
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इतना
प्यार
में
शर्मिंदा
हुआ
है
अब
तू
शर्म
से
मर
क्यूँ
नहीं
जाता
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