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Talib akbarabadi
aish sab zamaane ke dastyab hain lekin
aish sab zamaane ke dastyab hain lekin | ऐश सब ज़माने के दस्तयाब हैं लेकिन
- Talib akbarabadi
ऐश
सब
ज़माने
के
दस्तयाब
हैं
लेकिन
एक
शय
नहीं
मिलती
बस
सुकूँ
नहीं
मिलता
- Talib akbarabadi
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हुस्न
उनका
सादगी
में
कुछ
अलग
महका
किया
मैंने
धड़कन
से
कहा
धड़को
मगर
आराम
से
Ishq Allahabadi
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हम
रातों
को
उठ
उठ
के
जिनके
लिए
रोते
हैं
वो
ग़ैर
की
बाँहों
में
आराम
से
सोते
हैं
Hasrat Jaipuri
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कुछ
तो
करें
कि
दिल
ये
कहीं
और
जा
लगे
कुछ
देर
के
लिए
सही
आँखों
को
चैन
हो
Afzal Ali Afzal
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जो
चराग़
सारे
बुझा
चुके
उन्हें
इंतिज़ार
कहाँ
रहा
ये
सुकूँ
का
दौर-ए-शदीद
है
कोई
बे-क़रार
कहाँ
रहा
Ada Jafarey
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दिल
की
चोटों
ने
कभी
चैन
से
रहने
न
दिया
जब
चली
सर्द
हवा
मैं
ने
तुझे
याद
किया
Josh Malihabadi
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बोझ
उठाए
हुए
फिरती
है
हमारा
अब
तक
ऐ
ज़मीं
माँ
तिरी
ये
उम्र
तो
आराम
की
थी
Parveen Shakir
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एक
तख़्ती
अम्न
के
पैग़ाम
की
टांग
दीजे
ऊंचे
मीनारों
के
बीच
Aziz Nabeel
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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गुज़िश्ता
साल
कोई
मस्लहत
रही
होगी
गुज़िश्ता
साल
के
सुख
अब
के
साल
दे
मौला
Liyaqat Ali Aasim
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दिल्ली
से
हम
ही
बोला
करें
अम्न
की
बोली
यारो
तुम
भी
कभी
लाहौर
से
बोलो
Rahat Indori
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एक
सूट
लेना
है
वास्ते
हमें
उसके
वो
गले
नहीं
मिलती
नाप
ही
नहीं
मिलता
Talib akbarabadi
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सिग्नल
के
वो
इक
दो
लम्हे
बरसों
हमको
याद
रहे
गजरे
वाला
बोला
था
जब
साहब
जोड़ी
शाद
रहे
चौराहे
पर
याद
है
कैसे
देता
था
मजज़ूब
दु'आ
तेरे
घर
का
चूल्हा
चोखा
सदियों
तक
आबाद
रहे
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Talib akbarabadi
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छोड़ना
उसे
था
पर
छोड़
ही
न
पाया
मैं
क्योंकि
यार
उस
जैसा
दूसरा
नहीं
मिलता
Talib akbarabadi
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वो
शाम
भी
कुछ
यूँँ
ही
थी
जब
वो
गया
था
छोड़
कर
मेरा
दिसंबर
तो
कई
बरसों
तलक
क़ायम
रहा
Talib akbarabadi
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मैं
अकेला
लौट
के
आया
मकाँ
तक
यार
उसको
साथ
में
ही
लौटना
था
Talib akbarabadi
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