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Manoj Devdutt
vo rookh se parda hataati ja rahi hai
vo rookh se parda hataati ja rahi hai | वो रूख़ से पर्दा हटाती जा रही है
- Manoj Devdutt
वो
रूख़
से
पर्दा
हटाती
जा
रही
है
यूँँ
ईद
सबकी
वो
मनाती
जा
रही
है
- Manoj Devdutt
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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तेरी
जब
सिसकियाँ
रुकती
नहीं
हैं
मेरी
फिर
हिचकियाँ
रुकती
नहीं
हैं
दिखावा
तो
मुझे
आता
नहीं
पास
तभी
तो
लड़कियाँ
रुकती
नहीं
हैं
मेरे
दिल
के
शजर
पर
गुल
नहीं
है
कभी
फिर
तितलियाँ
रुकती
नहीं
हैं
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Manoj Devdutt
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अब
सफ़र
में
बारिशें
होती
हैं
फिर
अधूरी
ख़्वाहिशें
होती
हैं
अब
मुझे
ही
तो
नहीं
आती
हैं
पर
जहाँ
में
साजिशें
होती
हैं
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Manoj Devdutt
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झूठे
दिखाई
दे
रहे
हैं
अब
फिर
भी
सफ़ाई
दे
रहे
हैं
अब
जिन
मुल्ज़िमों
को
क़ैद
रखना
था
उनको
रिहाई
दे
रहे
हैं
अब
उम्मीद
जिनसे
थी
वफ़ा
की
ही
वो
बे-वफ़ाई
दे
रहे
हैं
अब
ता'रीफ़
की
आदत
लगी
उनको
सच
कब
सुनाई
दे
रहे
हैं
अब
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Manoj Devdutt
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पटाख़ा
मैं
जला
तो
दूँगा
पर
धमाका
कौन
संभालेगा
फिर
Manoj Devdutt
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उसने
जब
से
हम
दोनों
को
जुदा
किया
है
फिर
कब
मैंने
उस
पत्थर
को
ख़ुदा
किया
है
उसको
नावों
की
सवारी
अच्छी
लगती
थी
बस
उसके
ख़ातिर
ख़ुद
को
नाख़ुदा
किया
है
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Manoj Devdutt
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