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Manoj Devdutt
teri jab siskiyaan rukti nahin hain
teri jab siskiyaan rukti nahin hain | तेरी जब सिसकियाँ रुकती नहीं हैं
- Manoj Devdutt
तेरी
जब
सिसकियाँ
रुकती
नहीं
हैं
मेरी
फिर
हिचकियाँ
रुकती
नहीं
हैं
दिखावा
तो
मुझे
आता
नहीं
पास
तभी
तो
लड़कियाँ
रुकती
नहीं
हैं
मेरे
दिल
के
शजर
पर
गुल
नहीं
है
कभी
फिर
तितलियाँ
रुकती
नहीं
हैं
- Manoj Devdutt
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उसकी
दु'आ
में
जब
असर
होगा
बस
तब
हरा
सूखा
शजर
होगा
मैं
सोचता
हूँ
देखकर
तुझको
आगे
तेरे
क्या
वो
क़मर
होगा
तुम
जिस
जगह
पर
रह
रही
हो
अब
जन्नत
का
रस्ता
बस
वो
घर
होगा
तुम
चूम
लेती
होंट
जिसके
भी
बस
वो
ही
दुनिया
में
अमर
होगा
तुम
जिस
मकाँ
को
छोड़कर
आई
वो
बन
गया
अब
तो
खंडर
होगा
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Manoj Devdutt
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कभी
भी
कुछ
फ़िज़ूल
मैं
नहीं
करता
उधारी
भी
वसूल
मैं
नहीं
करता
गुनाहों
को
क़बूल
सब
करूँँगा
पर
किया
अच्छा
क़बूल
मैं
नहीं
करता
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Manoj Devdutt
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ख़ुद
को
तो
सब
सही
दिखाते
हैं
आइने
को
सभी
सताते
हैं
बाप
परवाह
करते
हैं
सबकी
बाप
परवाह
कब
जताते
हैं
पेज
तो
अब
बदल
रहे
हैं
पर
चित्र
हम
एक
ही
बनाते
हैं
एक
लड़की
हुई
नहीं
मेरी
फिर
कहाँ
ख़ुद
को
हम
सजाते
हैं
हमने
जिनको
दिखाई
थी
दुनिया
आँख
हमको
वही
दिखाते
हैं
आग
जिनको
बुझानी
थी
प्यारे
आग
अब
बस
वही
लगाते
हैं
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Manoj Devdutt
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आग
सीने
में
है
लगी
मेरे
फिर
सिगारे
मैं
कब
जलाता
हूँ
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छोड़कर
ग़ुर्बत
में
गए
थे
लोग
छोड़
फिर
ग़ुर्बत
भी
गई
मुझको
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