ग़ज़लगोकोग़ज़लसमझारहेहोतुम
पताहैक्याकिसेबतलारहेहोतुम
जहाँजबबहरहाहैइकतरफ़तोफिर
जहाँसेहीअलगक्यूँँजारहेहोतुम
पताहैमैंअभीपीतानहींफिरभी
मुझीकोजामक्यूँँपकड़ारहेहोतुम
दिखाकरख़्वाबअच्छेराहमेंमेरी
नुकीलेतारक्यूँँबिछवारहेहोतुम
भलेअपनीख़ुशीहमसेेछिपालेना
अभीग़मक्यूँँछिपातेजारहेहोतुम