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Manoj Devdutt
naye ghaav milte rahenge
naye ghaav milte rahenge | नए घाव मिलते रहेंगे
- Manoj Devdutt
नए
घाव
मिलते
रहेंगे
अभी
प्यार
में
जो
पड़े
हैं
- Manoj Devdutt
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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छोड़ो
दुनिया
की
परवाहें,
करो
मोहब्बत
मुश्किल
हों
कितनी
भी
राहें,
करो
मोहब्बत
सुनकर
देखो
सारे
मंदिर
यही
कहेंगे
यही
कहेंगी
सब
दरगाहें,
करो
मोहब्बत
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Bhaskar Shukla
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ज़िद
से
बढ़े
हैं
फ़ासले
अब
जहाँ
सूने
हुए
फिर
घोंसले
तब
वहाँ
माँ
बाप
फिर
तो
पस्त
होते
गए
हैं
दूर
उन
सेे
हौंसले
अब
कहाँ
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Manoj Devdutt
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स्वाभिमानी
को
यहाँ
कीमत
चुकानी
पड़
रही
है
फिर
कई
रातें
बिना
खाए
बितानी
पड़
रही
है
Manoj Devdutt
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होंठों
पर
उसके
इक
तिल
था
आया
जिस
पर
मेरा
दिल
था
उसकी
संगत
भारी
पड़ती
अक्सर
बढ़ता
मेरा
बिल
था
जो
भी
उस
सेे
मिलकर
बिछड़ा
वो
तो
मरता
फिर
तिल
तिल
था
दो
नज़रों
से
मारा
करता
ऐसा
इकलौता
क़ातिल
था
जात
अलग
थी,
मेरी
उसकी
फिर
तो
बिछड़ना
मुस्तक़बिल
था
जब
से
उसको
क्या
देखा
है
मनोज
भी
उसका
आमिल
था
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Manoj Devdutt
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मुझ
में
अँधेरा
इतना
ज़्यादा
अँधेरा
है
हर
दिन
काला
होता
मेरा
सवेरा
है
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Manoj Devdutt
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इतना
भी
तू
मक्कार
मत
बनना
फिर
तू
कभी
सरदार
मत
बनना
तू
साथ
तो
देना
सभी
का
पर
सबकी
तो
तू
दरकार
मत
बनना
जो
पीठ
में
ही
घोंप
दे
चाक़ू
तू
यार
बस
वो
यार
मत
बनना
हक़
और
किसी
का
मारना
हो
तो
ऐसी
जगह
हक़दार
मत
बनना
जो
गिड़गिड़ाकर
माँगना
हो
यार
तू
तो
कभी
वो
प्यार
मत
बनना
बनना
सहारा
हर
दफ़ा
सबका
पर
मुफ़्लिसी
की
मार
मत
बनना
बेटी
जहाँ
ज़िन्दा
जला
दी
हो
वैसा
कभी
परिवार
मत
बनना
इनकार
जिस
सेे
कर
रहे
हों
सब
बस
उसका
तू
इनकार
मत
बनना
इक
द्रोपदी
का
चीर
उतरे
है
तू
देव
वो
दरबार
मत
बनना
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Manoj Devdutt
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