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Manoj Devdutt
mujh
mujh | मुझ
- Manoj Devdutt
मुझ
में
अँधेरा
इतना
ज़्यादा
अँधेरा
है
हर
दिन
काला
होता
मेरा
सवेरा
है
- Manoj Devdutt
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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जैसे
कोई
रोता
है
गले
प्यार
से
लग
कर
कल
रात
मैं
रोया
तेरी
दीवार
से
लग
कर
Aziz Ejaaz
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मौत
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
नींद
क्यूँँ
रात
भर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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इक
रात
उस
ने
चंद
सितारे
बुझा
दिए
उस
को
लगा
था
कोई
उन्हें
गिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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अजीब
सानेहा
मुझ
पर
गुज़र
गया
यारो
मैं
अपने
साए
से
कल
रात
डर
गया
यारो
Shahryar
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ग़ज़ब
किया
तिरे
वअ'दे
पे
ए'तिबार
किया
तमाम
रात
क़यामत
का
इंतिज़ार
किया
Dagh Dehlvi
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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रात
आ
कर
गुज़र
भी
जाती
है
इक
हमारी
सहर
नहीं
होती
Ibn E Insha
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अब
तबीयत
ख़राब
रहती
है
हाथ
में
पर
शराब
रहती
है
मैं
मुसाफ़िर
हूँ
सहरा
का
और
उस
सहरा
में
वो
सराब
रहती
है
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Manoj Devdutt
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सच
जब
कड़वा
होता
है
तो
फिर
कड़वा
ही
लगेगा
झूठ
छलावा
अच्छा
होता
है
अच्छा
ही
लगेगा
Manoj Devdutt
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फिर
मार
देती
तीर
मुझको
करना
था
जब
नकीर
मुझको
माँ
बाप
साथ
रह
रहे
हैं
फिर
रहने
दो
फ़क़ीर
मुझको
सब
एक
हों
जहाँ
में
ऐसी
है
खींचनी
लकीर
मुझको
पीतल
सही
बना
रहूँ
बस
होना
नहीं
नज़ीर
मुझको
इंसान
ही
बना
रहूँ
अब
होना
नहीं
कबीर
मुझको
सब
काम
हों
मनोज
के
बस
होना
नहीं
वज़ीर
मुझको
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Manoj Devdutt
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जो
पार
हद
को
कर
गए
हैं
अब
ज़िन्दा
नहीं
हैं
मर
गए
हैं
अब
सब
रात
को
घर
ही
गए
थे
पर
तारे
सवेरे
घर
गए
हैं
अब
अब
आग
जिसने
भी
लगाई
थी
जल
उनके
भी
तो
घर
गए
हैं
अब
दौलत
नहीं
तो
क्या
हुआ
शायर
पन्ने
बहुत-से
भर
गए
हैं
अब
सच
बोलने
निकला
कोई
भी
जब
नेता
सभी
फिर
डर
गए
हैं
अब
अब
प्यार
करना
था
नहीं
हमको
पर
प्यार
तो
हम
कर
गए
हैं
अब
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Manoj Devdutt
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कलाई
पर
घड़ी
यूँँ
भी
नहीं
बाँधी
कभी
मैंने
किसी
को
भी
समय
अब
नाप
कर
देता
नहीं
हूँ
मैं
Manoj Devdutt
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