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Manoj Devdutt
kishtein chukaata rah gaya vo baap par
kishtein chukaata rah gaya vo baap par | किश्तें चुकाता रह गया वो बाप पर
- Manoj Devdutt
किश्तें
चुकाता
रह
गया
वो
बाप
पर
दामाद
की
फ़रमाइशे
सब
पूरी
कीं
- Manoj Devdutt
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हड्डियाँ
बाप
की
गूदे
से
हुई
हैं
ख़ाली
कम
से
कम
अब
तो
ये
बेटे
भी
कमाने
लग
जाएँ
Rauf Khair
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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न
जाने
कौन
सी
दौलत
अता
करता
है
रब
इनको
किसी
भी
बाप
को
मुफ़्लिस
कभी
देखा
नहीं
मैंने
Saheb Shrey
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मुझको
छाँव
में
रखा
और
ख़ुद
भी
वो
जलता
रहा
मैंने
देखा
इक
फ़रिश्ता
बाप
की
परछाईं
में
Unknown
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उसके
वालिद
नवाब
हैं
भाई
उसको
हक़
है
हमें
भुलाने
का
Deepak Sharma Deep
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सुब्ह
सवेरे
नंगे
पाँव
घास
पे
चलना
ऐसा
है
जैसे
बाप
का
पहला
बोसा
क़ुर्बत
जैसे
माँओं
की
Hammad Niyazi
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अज़ीज़-तर
मुझे
रखता
है
वो
रग-ए-जाँ
से
ये
बात
सच
है
मेरा
बाप
कम
नहीं
माँ
से
Tahir Shaheer
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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बीस
बरस
तक
बाप
उधड़ता
है
थोड़ा
थोड़ा
तब
सिलता
है
इक
बेटी
की
शादी
का
जोड़ा
Tanoj Dadhich
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बेटियाँ
बाप
की
आँखों
में
छुपे
ख़्वाब
को
पहचानती
हैं
और
कोई
दूसरा
इस
ख़्वाब
को
पढ़
ले
तो
बुरा
मानती
हैं
Iftikhar Arif
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दस्तूर
दुनिया
का
चला
ये
आ
रहा
है
पहले
से
ताक़तवरों
के
हाथ
तो
कमज़ोर
का
चलता
है
मुॅंह
Manoj Devdutt
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क़र्ज़
उनका
हम
चुकाएँ
कैसे
फ़र्ज़
अपना
हम
निभाएँ
कैसे
पिंजरा
अब
हम
खोल
तो
देंगे
पर
उड़ना
पंछी
को
सिखाएँ
कैसे
साख़
काटी
जिस
शजर
की
तुमने
फूल
उसके
मुस्कुराएँ
कैसे
वस्ल
के
ही
ज़ख़्म
अब
दुखते
हैं
ज़ख़्म
ये
फिर
हम
दिखाएँ
कैसे
भीड़
ने
नंगा
किया
औरत
को
गर्व
से
सर
हम
उठाएँ
कैसे
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Manoj Devdutt
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वो
रूख़
से
पर्दा
हटाती
जा
रही
है
यूँँ
ईद
सबकी
वो
मनाती
जा
रही
है
Manoj Devdutt
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होंठों
पर
उसके
इक
तिल
था
आया
जिस
पर
मेरा
दिल
था
उसकी
संगत
भारी
पड़ती
अक्सर
बढ़ता
मेरा
बिल
था
जो
भी
उस
सेे
मिलकर
बिछड़ा
वो
तो
मरता
फिर
तिल
तिल
था
दो
नज़रों
से
मारा
करता
ऐसा
इकलौता
क़ातिल
था
जात
अलग
थी,
मेरी
उसकी
फिर
तो
बिछड़ना
मुस्तक़बिल
था
जब
से
उसको
क्या
देखा
है
मनोज
भी
उसका
आमिल
था
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Manoj Devdutt
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पहले
मुझको
ख़लील
करता
है
फिर
मुझे
वो
ज़लील
करता
है
जानता
है
ग़लत
है
वो
फिर
भी
पेश
अपनी
दलील
करता
है
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Manoj Devdutt
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