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Manoj Devdutt
ek din main kya zaraa sa roya
ek din main kya zaraa sa roya | एक दिन मैं क्या ज़रा सा रोया
- Manoj Devdutt
एक
दिन
मैं
क्या
ज़रा
सा
रोया
तब
उदासी
हँस
रही
थी
मुझपर
- Manoj Devdutt
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वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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उदासी
पर
कहे
हैं
शे'र
सबने
उदासी
को
जिया
कितनों
ने
लेकिन
?
Tanoj Dadhich
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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वक़्त
की
गर्दिशों
का
ग़म
न
करो
हौसले
मुश्किलों
में
पलते
हैं
Mahfuzur Rahman Adil
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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जानता
हूँ
एक
ऐसे
शख़्स
को
मैं
भी
'मुनीर'
ग़म
से
पत्थर
हो
गया
लेकिन
कभी
रोया
नहीं
Muneer Niyazi
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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मुझ
में
अँधेरा
इतना
ज़्यादा
अँधेरा
है
हर
दिन
काला
होता
मेरा
सवेरा
है
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Manoj Devdutt
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अच्छा
होना
ख़राब
है
और
बहुत
हूँ
ख़राब
मैं
Manoj Devdutt
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बंद
खिड़की
खोलना
मुश्किल
है
सच
यहाँ
बोलना
मुश्किल
है
मुंसिफ़ों
की
आँख
पर
पट्टी
है
फिर
बराबर
तौलना
मुश्किल
है
पैर
में
बांधी
गई
है
बेड़ी
फिर
कहाँ
अब
डोलना
मुश्किल
है
हम
मोहब्बत
में
पड़े
हैं
जबसे
ख़ून
तबसे
खौलना
मुश्किल
है
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Manoj Devdutt
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ख़ुदा
के
नाम
पर
लड़वा
रहे
नेता
हमें
कितना
ग़लत
समझा
रहे
नेता
ग़रीबी
को
मिटाने
निकले
थे
वो
पर
ग़रीबों
को
मिटाते
जा
रहे
नेता
कभी
हक़
ये
अमीरों
का
नहीं
खाते
सभी
हक़
मुफ़्लिसों
का
खा
रहे
नेता
सभी
के
हाथ
जोड़े
जीतने
को
बस
सभी
से
पैर
फिर
छिलवा
रहे
नेता
पढ़े
ख़ुद
है
नहीं
लेकिन
पढ़ाना
क्या
हटाना
क्या
है
ये
बतला
रहे
नेता
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Manoj Devdutt
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दीवानगी
की
हद
से
हम
गुज़र
गए
पर
यार
क्यूँ
फिर
वादे
से
मुकर
गए
Manoj Devdutt
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