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Manoj Devdutt
ab yahaañ koi bhi qadr-daan hai nahin
ab yahaañ koi bhi qadr-daan hai nahin | अब यहाँ कोई भी क़द्र-दाँ है नहीं
- Manoj Devdutt
अब
यहाँ
कोई
भी
क़द्र-दाँ
है
नहीं
देखते
पहले
सब
ज़ात
और
धर्म
हैं
- Manoj Devdutt
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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अब
तो
मज़हब
कोई
ऐसा
भी
चलाया
जाए
जिस
में
इंसान
को
इंसान
बनाया
जाए
Gopaldas Neeraj
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घर
से
मस्जिद
है
बहुत
दूर
चलो
यूँँ
कर
लें
किसी
रोते
हुए
बच्चे
को
हँसाया
जाए
Nida Fazli
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पहले
पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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हम
ऐसे
सुनते
हैं
उसकी
बातों
को
जैसे
कोई
सूफ़ी
गाने
सुनता
है
Tanoj Dadhich
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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अल्लाह
बना
दे
मिरे
अश्कों
को
कबूतर
सब
पूछ
रहे
हैं
तिरे
रूमाल
में
क्या
है
Khan Janbaz
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इक
दिन
के
लिए
घर
को
परी-ख़ाना
बना
दे
अल्लाह
मुझे
उनका
ग़ुसल-ख़ाना
बना
दे
मोटी
है
बहुत
बीवी
तो
हुश्यार
रहा
कर
वो
मूड
में
आकर
तेरा
सुरमा
ना
बना
दे
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Paplu Lucknawi
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अल्लाह
तेरे
हाथ
है
अब
आबरू-ए-शौक़
दम
घुट
रहा
है
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Bismil Azimabadi
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कई
दिन
से
सफ़ा
नहीं
हुई
है
छत
मगर
फिर
भी
ख़फ़ा
नहीं
हुई
है
छत
अलग
हर
बार
हो
रहें
हैं
ये
कमरे
अलग
पर
हर
दफ़ा
नहीं
हुई
है
छत
हमेशा
बे-वफ़ा
हुए
हैं
ये
कमरे
कभी
भी
बे-वफ़ा
नहीं
हुई
है
छत
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Manoj Devdutt
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ग़म
सभी
अपने
गवारा
करके
ख़ुश
थे
हम
तुझको
सितारा
करके
देखती
थी
वो
मुझे
पर
मैं
ही
तो
बुलाता
था
इशारा
करके
पूछता
है
वो
हमारी
मर्ज़ी
क़त्ल
पर
पहले
हमारा
करके
इश्क़
अब
इक
बार
कब
होता
है
देखना
तुम
भी
दुबारा
करके
साथ
ख़ुद
के
ख़ुश
नहीं
था
इतना
जितना
हूॅं
ख़ुद
को
तुम्हारा
करके
तुम
बनो
मेरा
सहारा
तो
मैं
ख़ुद
को
रखता
बे-सहारा
करके
है
ख़बर
होगा
नहीं
तेरे
बिन
फिर
भी
देखेंगे
गुजारा
करके
लौट
आऊँगा
जहन्नुम
से
मैं
तुम
बुलाना
बस
तुम्हारा
करके
दस्तरस
में
है
तेरे
अब
ये
देव
मस्त
रह
ग़म
से
किनारा
करके
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Manoj Devdutt
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सबने
हँसी
तो
देख
ली
मेरी
देखें
नहीं
है
ग़म
किसी
ने
भी
Manoj Devdutt
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वो
भी
छोड़ा
है
जो
छोड़ा
न
जा
सके
उतना
टूटा
जितना
तोड़ा
न
जा
सके
Manoj Devdutt
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तूफ़ान
के
निशान
रह
गए
हैं
मलबे
नुमा
मकान
रह
गए
हैं
ओले
पड़े
तभी
यहाँ
सभी
फिर
रोते
हुए
किसान
रह
गए
हैं
बेटी
को
ही
पढ़ाना
था
उसको
दो
ख़ाली
माँ
के
कान
रह
गए
हैं
फल
तो
कभी
मिला
नहीं
हमको
हिस्से
में
इम्तिहान
रह
गए
हैं
इंसानियत
सभी
की
मर
गई
है
मुर्दा
यहाँ
जहान
रह
गए
हैं
चाहत
तो
मार
दी
गई
है
यहाँ
नफ़रत
के
ख़ानदान
रह
गए
हैं
घर
इसलिए
बिखर
रहा
था
एक
दो
भाई
में
गुमान
रह
गए
हैं
माँ
बाप
को
निकालते
ही
घर
में
ख़ाली
मर्तबान
रह
गए
हैं
क्यूँँ
बोलते
नहीं
मनोज
ये
लोग
सब
बनके
बे-ज़बान
रह
गए
हैं
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Manoj Devdutt
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