yaad kar roye ek aadh dukh-dard ham | याद कर रोए एक आध दुख-दर्द हम

  - Rohit Kumar Madhu Vaibhav
यादकररोएएकआधदुख-दर्दहम
टूटकरगिरगईंडालियाँवर्दहम
रातभरचुभतीइकजिस्मकीरौशनी
ओढ़करसोगएएकहम-दर्दहम
कैसेजीपाएगादिलहमाराकहीं
हैमोहब्बतसबाजिसकेपर्वर्दहम
सूखतेफूलपरइत्रछिड़केकोई
हरग़ज़लआपकीऔरआवर्दहम
इश्क़मेंजंगमेंसबहैवाजिबमगर
चाहतेनइँमोहब्बतमेंनावर्दहम
  - Rohit Kumar Madhu Vaibhav
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