mazhabi jang | "मज़हबी जंग"

  - MAHESH CHAUHAN NARNAULI
"मज़हबीजंग"
उधरमज़हबीजंगकाशोरहै
ख़ुदामेराघरभीउसीओरहै
तबाहीकामंज़रहैजाएँजिधर
हैटूटीइमारतदुकानेंसभी
हैपत्थरहीपत्थरफ़क़तराहपर
कहींचीख़नेकीसदाहै
कहींख़ामुशीकाहैआलम
कहींखूँसेलथपथपड़ाहैकोई
हैंतलवारहाथोंमेंपकड़ेकई
सितमगरबढ़ातेबग़ावत
दैर-ओ-हरमहैसलामत
ज़मींपरहैउतरीक़यामत
हैबिगड़ेसेहालातअबशहरमें
हुईहैंमियाँ
कईज़िंदगीख़त्मइसबैरमें
फ़ज़ामेंमिलीहैहवाख़ौफ़की
समुंदरलबा-लबहैलाशोंसेही
महफ़ूज़कोईयहाँठौरहै
येउठताधुआँऔरजलतामकाँ
बतातेहैंनफ़रतकायहदौरहै
  - MAHESH CHAUHAN NARNAULI
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