लज़्ज़त-ए-ग़मकोज़मानायूँँबढ़ाताहै
तोड़करदिलकोवोजैसेमुस्कुराताहै
मेरादामनतोबड़ाहीपाकहैयारो
येज़मानाकिसलिएतोहमतलगाताहै
मानताहूँमैंयहाँख़ुदकोअमीर-ए-दिल
मुफ्लिसीमेंदिनमगरयेकटहीजाताहै
बातकोकहनेसेडरताहैयहाँकितना
रोज़दुनियासेनईवोमातखाताहै
अबसमुंदरकोतलबहैयारपानीकी
इसलिएआवाज़मुझकोवोलगाताहै