kahiin qissa ham apna chhod aa.e hain | कहीं क़िस्सा हम अपना छोड़ आए हैं

  - Lalit Mohan Joshi
कहींक़िस्साहमअपनाछोड़आएहैं
येकैसाअबतोमंज़रहमछुपाएहैं
ग़रीबीकोख़मोशीसेबहुतसहते
यक़ीननदर्दकोहमरासआएहैं
यहाँकोईकिसीकाहैनहींअबतो
ज़मानेकोसुनोफिरआज़माएहैं
हुआअश्कोंकीनदियोंसेयूँँफिरमिलना
समुंदरकेमगरअपनेकिनारेहैं
हमेंरखतीबचाएहैदु'आमाँकी
तभीहमजीततेमाँकेसहारेहैं
'ललित'कोआज़मातेलोगदेखोफिर
जहाँमेंदोस्तोंक्यूँँवोइतनेछाएहैं
  - Lalit Mohan Joshi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy