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Kumar Aryan
kalaaee kaat lene se bhi mushkil
kalaaee kaat lene se bhi mushkil | कलाई काट लेने से भी मुश्किल
- Kumar Aryan
कलाई
काट
लेने
से
भी
मुश्किल
जुदाई
काटना
हमको
लगे
है
ये
कैसा
रोग
है
जिसको
कि
यारो
कोई
देखे
तो
उसका
दिल
जले
है
- Kumar Aryan
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दर्द
का
जब
भी
कोई
गीत
गाऍंगे
रो
पड़ेगें
लोग
आँसू
बहाऍंगे
हँस
रहे
हैं
सब
मिरी
ज़िंदगी
पे
रब
मौत
आएगी
तो
सबको
रुलाऍंगे
कौन
कब
कैसे
छला
जानता
हूँ
पर
अपने
थे
अपनों
से
कैसे
बताऍंगे
मोम
को
पत्थर
बनाकर
कहा
उसने
अब
नहीं
दिल
आपका
हम
दुखाएँगे
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Kumar Aryan
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स्वच्छ
कोई
जल
नहीं
है
वायु
भी
निर्मल
नहीं
है
जीना
जितना
हो
कठिन
पर
मरना
कोई
हल
नहीं
है
बातें
कड़वी
करता
हूँ
मैं
दिल
में
कोई
छल
नहीं
है
तन
पे
रेशम
डाले
आया
पाँव
में
चप्पल
नहीं
है
जितनी
कोमल
उसकी
वाणी
उतनी
वो
कोमल
नहीं
है
शहरों
में
है
शोर
लेकिन
बस्ती
में
हलचल
नहीं
है
सोचता
हूँ
माओं
के
अब
सर
पे
क्यूँ
आँचल
नहीं
है
बाप
घर
कैसे
चलाए
बाज़ू
में
अब
बल
नहीं
है
रक्षा
हो
कैसे
सिया
की
अब
वो
रामा
दल
नहीं
है
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Kumar Aryan
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तानसेन
आप
हो
तो
हो
मैं
तो
बावरा
हूँ
बावरा
Kumar Aryan
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आधी
रोटी
खाई
पर
ईमान
की
बेचकर
ईमान
कुछ
खाया
नहीं
Kumar Aryan
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जो
मुझपे
गुज़रा
है
जानाँ
तुझपर
गुज़रे
तो
तू
जाने
Kumar Aryan
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