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Kumar Aryan
swachh koii jal nahin hai
swachh koii jal nahin hai | स्वच्छ कोई जल नहीं है
- Kumar Aryan
स्वच्छ
कोई
जल
नहीं
है
वायु
भी
निर्मल
नहीं
है
जीना
जितना
हो
कठिन
पर
मरना
कोई
हल
नहीं
है
बातें
कड़वी
करता
हूँ
मैं
दिल
में
कोई
छल
नहीं
है
तन
पे
रेशम
डाले
आया
पाँव
में
चप्पल
नहीं
है
जितनी
कोमल
उसकी
वाणी
उतनी
वो
कोमल
नहीं
है
शहरों
में
है
शोर
लेकिन
बस्ती
में
हलचल
नहीं
है
सोचता
हूँ
माओं
के
अब
सर
पे
क्यूँ
आँचल
नहीं
है
बाप
घर
कैसे
चलाए
बाज़ू
में
अब
बल
नहीं
है
रक्षा
हो
कैसे
सिया
की
अब
वो
रामा
दल
नहीं
है
- Kumar Aryan
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बिक
रही
है
यहाँ
मुहब्बत
एक
सरकारी
नौकरी
पर
Kumar Aryan
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कहूँ
मैं
क्या
के
मेरे
पास
क्या
सलामत
है
मेरा
वजूद
मेरा
हौसला
सलामत
है
Kumar Aryan
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किसी
की
याद
में
दिल
मुसलसल
जल
रहा
है
Kumar Aryan
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हबीब
साथ
दे
मेरा
या
मेरा
साथ
छोड़
दे
भरोसा
है
तो
साथ
चल
वगरना
हाथ
छोड़
दे
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Kumar Aryan
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बोलो
यार
करोगे
क्या
मुझ
सेे
प्यार
करोगे
क्या
कुछ
तो
बोलो
पीछे
से
मुझपे
वार
करोगे
क्या
काम
नहीं
आसाँ
फिर
भी
बेड़ा
पार
करोगे
क्या
दुश्मन
से
ऐ
दोस्त
कहो
नैना
चार
करोगे
क्या
काम
नहीं
मुझ
सेे
तो
फिर
तुम
दीदार
करोगे
क्या
मैं
भी
झूटा
और
तुम
भी
फिर
अख़बार
करोगे
क्या
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Kumar Aryan
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