tumhaari ghazlon ko mehfilon men jo gungunaaye to kya karoge | तुम्हारी ग़ज़लों को महफ़िलों में जो गुनगुनाए तो क्या करोगे

  - Kumar Aryan
तुम्हारीग़ज़लोंकोमहफ़िलोंमेंजोगुनगुनाएतोक्याकरोगे
तुम्हारीपलकोंपेख़्वाबअपनेकोईसजाएतोक्याकरोगे
वोजिसकेवादेपेकरभरोसाजोछोड़दीतुमनेमेरीदुनिया
वहीजोअहद-ए-वफ़ाकिसीदिननहींनिभाएतोक्याकरोगे
मुझेरुलाकरकेछोड़जानेकीज़िदमेंजिसकोहँसायातुमने
वहीमुहब्बतमेंतुमकोजानासदारुलाएतोक्याकरोगे
बनाकेअपनादिखाकेसपनाकोईजोअपनातुम्हेंरुलाए
कभीमुहब्बतकेपाठतुमकोजोवोपढाएतोक्याकरोगे
  - Kumar Aryan
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