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Kumar Aryan
anaginat upkaar bhool jaayen
anaginat upkaar bhool jaayen | अनगिनत उपकार भूल जाएँ
- Kumar Aryan
अनगिनत
उपकार
भूल
जाएँ
दोस्तों
का
प्यार
भूल
जाएँ
बेटा
तो
नादान
है
मगर
हम
बाप
का
किरदार
भूल
जाएँ
एक
ग़लती
हो
तो
ठीक
साहब
बोलिए
हर
बार
भूल
जाएँ
वार
जिस
सेे
आपने
किया
है
तीर
या
तलवार
भूल
जाएँ
नौकरी
तो
ठीक
है
मगर
ये
यार
का
इतवार
भूल
जाएँ
प्यार
से
मिलते
रहें,
ये
नफ़रत
आइए
सरकार
भूल
जाएँ
किसने
ग़द्दारी
हुज़ूर
की
थी
कौन
था
ख़ुद्दार
भूल
जाएँ
ज़िन्दगी
क्या
है
कुमार
भाई
ख़ुशनुमा
संसार
भूल
जाएँ
- Kumar Aryan
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रोज़
मेरे
घर
की
जिम्मेदारियाँ
मुझ
को
आ
कर
भूल
जाने
का
तुझे
अब
मशवरा
दे
रही
हैं
Faiz Ahmad
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मैं
भूल
जाऊँ
तुम्हें
अब
यही
मुनासिब
है
मगर
भुलाना
भी
चाहूँ
तो
किस
तरह
भूलूँ
Javed Akhtar
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काश
तू
सब
याद
रखती
और
मैं
सब
भूल
जाता
हाँ
मगर
ऐसा
न
होना
भी
तो
क़िस्मत
थी
हमारी
shaan manral
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या'नी
तुम
वो
हो
वाक़ई
हद
है
मैं
तो
सच-मुच
सभी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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तुमने
किया
न
याद
कभी
भूल
कर
हमें
हमने
तुम्हारी
याद
में
सब
कुछ
भुला
दिया
Bahadur Shah Zafar
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हमने
सब
सीखा
था
उसके
ख़ातिर
बस
भूल
उसे
ख़ुद
जीना
सीख
नहीं
पाए
Surya Tiwari
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दो
-चार
दिन
में
भूल
जायेगें
मिरे
अपने
मुझे
मैं
कोइ
होली,
दशहरा
हूँ
जो
मनाया
जाऊँगा
karan singh rajput
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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जिस
बेटे
से
माँ-बाप
राज़ी
हों
उस
बेटे
से
अल्लाह
राज़ी
हो
Kumar Aryan
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इक
दु'आ
मेरे
ख़ुदा
क़ुबूल
कर
भूख
से
मरे
न
कोई
भूल
कर
Kumar Aryan
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इस
तरह
उसने
मुझ
सेे
किनारा
किया
दूर
रहने
का
पैहम
इशारा
किया
Kumar Aryan
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सच
ये
है
कि
झूटा
किसी
का
यार
नहीं
हूँ
ये
बात
अलग
है
किसी
का
प्यार
नहीं
हूँ
मैं
क्या
कहूँ
ऐ
यार
तुम्हें
झूट
ही
जिस
में
छपता
है
सरेआम
वो
अख़बार
नहीं
हूँ
जब
तक
है
मेरी
जान
सदा
सच
ही
कहूँगा
ये
जान
लो
झूटा
मैं
क़लमकार
नहीं
हूँ
वा'दा
किया
है
जो
भी
निभाऊँगा
मैं
वो
सब
ये
याद
रखो
आज
की
सरकार
नहीं
हूँ
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Kumar Aryan
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दोस्त
था
इसलिए
पीठ
पे
तीर
मारा
जो
अदू
होता
तो
सीने
पे
वार
करता
Kumar Aryan
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