aadmi ye kyuuñ samajh paaya nahin | आदमी ये क्यूँ समझ पाया नहीं

  - Kumar Aryan
आदमीयेक्यूँसमझपायानहीं
ताक़यामतचलतीयेकायानहीं
क्याहुआजोयारहँसपायामैं
हाँमगरग़मकोकियाजायानहीं
शह्रतोपहलेसेहीवीरानथा
गाँवमेंभीपेड़कीछायानहीं
कैसेचलताहोगाउसबच्चेकाघर
जिसकेसरपरबापकासायानहीं
रोपड़ीयेसोचकरबीमारमाँ
देखनेबेटामेराआयानहीं
रामनेमस्जिदकोईतोड़ीनहीं
शैखनेमन्दिरकोईढ़ायानहीं
बेचदेंगेयेलुटेरेमुल्कको
येहक़ीक़तहैकोईमायानहीं
तानछेड़ीहैमुख़ालिफ़ज़ुल्मके
रागदरबारीकभीगायानहीं
आधीरोटीखाईपरईमानकी
बेचकरईमानकुछखायानहीं
दारपरचढ़जाऊँगासचबोलकर
झूठकाचेहरामुझेभायानहीं
हरक़दमपरचोटखाईहैकुमार
मुँहमगरइकदिनभीलटकायानहीं
  - Kumar Aryan
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