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Rohan Hamirpuriya
bikhraai zulfen usne to shaane pe aa gaii
bikhraai zulfen usne to shaane pe aa gaii | बिखराई ज़ुल्फ़ें उसने तो शाने पे आ गई
- Rohan Hamirpuriya
बिखराई
ज़ुल्फ़ें
उसने
तो
शाने
पे
आ
गई
यानी
कि
अपनी
जान
निशाने
पे
आ
गई
- Rohan Hamirpuriya
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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तुम
को
कम
लगते
हैं
नगीने
से
शे'र
सींचे
हैं
ख़ूँ-पसीने
से
सर्द
मौसम
है
और
मैं
तन्हा
हूँ
मुझ
को
नफ़रत
है
इस
महीने
से
मौजों
की
थी
रवानी
कुछ
ऐसी
बाँध
कर
ले
गई
सफ़ीने
से
जिस
से
बरसों
से
झगड़ा
है
अपना
तुम
भी
मिल
आई
उस
कमीने
से
तुम
हो
हक़दार
मुझ
से
बेहतर
के
उस
ने
छोड़ा
भी
तो
क़रीने
से
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Rohan Hamirpuriya
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आप
ही
बनना
पड़ा
अपना
ही
रहबर
मुझे
उम्र
हुई
दूजों
के
रस्तों
पे
चलते
हुए
Rohan Hamirpuriya
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ख़ुद
का
ही
मैं
अज़ीज़
ठहरा
हाँ
अना
का
मरीज़
ठहरा
है
वफ़ादार
घर
का
कुत्ता
आदमी
बद-तमीज़
ठहरा
जिस
को
बातिल
था
माना
हम
ने
वो
तो
हर
दिल
अज़ीज़
ठहरा
जिन
को
उर्दू
का
फ़न
अता
हैं
लहजा
उन
का
लज़ीज़
ठहरा
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Rohan Hamirpuriya
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मुहब्बत
कम
लुटा
पगले
न
बन
इस
में
ख़ुदा
पगले
ज़ियादा
हैं
तेरे
शैदा
कोई
कोठा
बसा
पगले
लिपिस्टिक
है
तेरे
लब
पर
बहाने
कम
बना
पगले
ख़राबे
से
सुकूँ
तू
पा
मैं
वापस
घर
चला
पगले
यही
मुमकिन
था
उजलत
में
न
हूँ
तुझ
से
ख़फ़ा
पगले
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Rohan Hamirpuriya
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गर्मी
दिल्ली
की
सह
नहीं
पाते
बात
करते
हैं
साथ
रहने
की
Rohan Hamirpuriya
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