ghar se niklaa tha faqat main ik safar ke vaaste | घर से निकला था फ़क़त मैं इक सफ़र के वास्ते

  - Khalid Azad
घरसेनिकलाथाफ़क़तमैंइकसफ़रकेवास्ते
क्याख़बरथीचलपड़ाहूँउम्रभरकेवास्ते
इनहवाओंसेहमेंमिलतोगयाहैइकसुकूँ
परपरिंदेरोपड़ेहैंअपनेघरकेवास्ते
धूपकीशिद्दतसेजबहमहोगएलाचारतो
फिरतड़पतेरहगएहैंउसशजरकेवास्ते
ख़्वाबतोदेखेबहुतपररासकुछआयानहीं
तेराचेहराचाहिएथाइसनज़रकेवास्ते
उसकीख़्वाहिशबसहैइतनीदेखलेबेटाज़रा
कुछनहींअबचाहिएउसकोगुज़रकेवास्ते
ख़्वाहिशोंकाबोझलेकरबेवजहचलतेरहे
एकजुगनूहीबहुतथाउससहरकेवास्ते
  - Khalid Azad
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