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Aashish kargeti 'Kash'
mujh ko to lagta hai tabiyat theek nahinkhair bataaoon haal tumhaara kaisa hai
mujh ko to lagta hai tabiyat theek nahinkhair bataaoon haal tumhaara kaisa hai | मुझ को तो लगता है तबियत ठीक नहीं
- Aashish kargeti 'Kash'
मुझ
को
तो
लगता
है
तबियत
ठीक
नहीं
खैर
बताओं
हाल
तुम्हारा
कैसा
है
- Aashish kargeti 'Kash'
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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बैठे
बिठाए
हम
को
सनम
याद
आ
गए
फिर
उन
के
साथ
उन
के
करम
याद
आ
गए
कोई
जो
राह
चलते
अचानक
मिला
मियाँ
हम
को
हर
एक
रंज-ओ-अलम
याद
आ
गए
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shaan manral
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कुछ
तबीयत
में
उदासी
भी
हुआ
करती
है
हर
कोई
इश्क़
का
मारा
हो,
ज़रूरी
तो
नहीं
Jaani Lakhnavi
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चारागरी
की
बात
किसी
और
से
करो
अब
हो
गए
हैं
यारो
पुराने
मरीज़
हम
Shuja Khawar
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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ये
मुझे
नींद
में
चलने
की
जो
बीमारी
है
मुझ
को
इक
ख़्वाब-सरा
अपनी
तरफ़
खींचती
है
Shahid Zaki
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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भारत
के
उपकार
को,
मान
रहे
सब
लोग
रोग
'घटाने'
के
लिए,
दिया
विश्व
को
'योग'
Divy Kamaldhwaj
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हाँ
ठीक
है
मैं
अपनी
अना
का
मरीज़
हूँ
आख़िर
मिरे
मिज़ाज
में
क्यूँँ
दख़्ल
दे
कोई
Jaun Elia
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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तुम्हें
क्यूँ
न
जाने
ये
घाटा
हुआ
है
मुनाफ़ा
हुआ
है
मुझे
इस
सफ़र
से
Aashish kargeti 'Kash'
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मुझ
को
दिलबर
दिन-भर
सुन
कुछ
अच्छी
बातें
कर
सुन
हर
धड़कन
पर
नाम
तिरा
सीने
पर
सर
रख
कर
सुन
फट
से
हो
जा
मेरी
अब
ग़ौर
से
मेरा
मंतर
सुन
जो
बाहर
है
रहने
दे
जो
तेरे
है
भीतर
सुन
दूर
के
ढोल
लगे
अच्छे
पास
से
इनको
आ
कर
सुन
क्या
आऊँगा
दिन
में
याद
जाना
है
कल
दफ़्तर
सुन
दिल
तो
सारे
झूठे
है
क्या
कहता
ये
पत्थर
सुन
तेरे
चक्कर
में
'आशीष'
सालों
भटका
दर
दर
सुन
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Aashish kargeti 'Kash'
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आग
लगाकर
शाम
सुहानी
नइँ
करनी
हमको
उन
की
आँखें
पानी
नइँ
करनी
उन
के
साथ
में
ख़ुद
पर
क़ाबू
रखना
है
कोई
भी
हरकत
जिस्मानी
नइँ
करनी
रोज़
हमारी
जितनी
बातें
होती
हैं
कल
से
उन
से
नैन
मिलानी
नइँ
करनी
आधी
रात
में
हमको
ये
एहसास
हुआ
घर
की
इतनी
भी
निगरानी
नइँ
करनी
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मौसम
भी
बरसाती
है
अंदर
बारिश
आती
है
नन्ही
सी
इस
कुटिया
में
झील
बना
कर
लाती
है
बस
इतना
ही
काफी
है
हर
आफ़त
टल
जाती
है
अब
भी
मेरे
सपनों
में
पहले
वाली
आती
है
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Aashish kargeti 'Kash'
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अब
बताओ
किसी
से
क्या
उसको
हम
सेफ़र
मिल
गया
नया
उसको
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