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Kalamkash
teri furqat ka rang teri muhabbat se gahra hai
teri furqat ka rang teri muhabbat se gahra hai | तेरी फ़ुर्क़त का रंग तेरी मुहब्बत से गहरा है
- Kalamkash
तेरी
फ़ुर्क़त
का
रंग
तेरी
मुहब्बत
से
गहरा
है
तेरी
नफ़रत
का
रंग
तेरी
उल्फ़त
से
गहरा
है
- Kalamkash
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पूछे
हैं
वजह-ए-गिरिया-ए-ख़ूनी
जो
मुझ
सेे
लोग
क्या
देखते
नहीं
हैं
सब
उस
बे-वफ़ा
का
रंग
Meer Taqi Meer
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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जब
फागुन
रंग
झमकते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
और
दफ़
के
शोर
खड़कते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
Nazeer Akbarabadi
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दिल
की
दीवार
पर
सिवा
उस
के
रंग
दूजा
कोई
चढ़ा
ही
नहीं
Siraj Faisal Khan
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बिखर
के
फूल
फ़ज़ाओं
में
बास
छोड़
गया
तमाम
रंग
यहीं
आस-पास
छोड़
गया
Aanis Moin
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रंग-ओ-रस
की
हवस
और
बस
मसअला
दस्तरस
और
बस
यूँँ
बुनी
हैं
रगें
जिस्म
की
एक
नस
टस
से
मस
और
बस
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Ammar Iqbal
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प्यादों
के
रंग
अलग
है
मगर
जाएँगे
सभी
शतरंज
ख़त्म
होने
पे
बक्से
में
एक
ही
Maher painter 'Musavvir'
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बहार
आई
कि
दिन
होली
के
आए
गुलों
में
रंग
खेला
जा
रहा
है
Jaleel Manikpuri
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रंग
गालों
पे
लगा
रहने
दो
ख़ूब
जँचता
है
ये
गहना
तुम
पर
Mukesh Jha
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गले
मुझ
को
लगा
लो
ऐ
मेरे
दिलदार
होली
में
बुझे
दिल
की
लगी
भी
तो
ऐ
मेरे
यार
होली
में
गुलाबी
गाल
पर
कुछ
रंग
मुझ
को
भी
जमाने
दो
मनाने
दो
मुझे
भी
जान-ए-मन
त्यौहार
होली
में
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Bhartendu Harishchandra
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वो
हक़ीक़त
थी
जिसे
ठुकरा
गया
तू
ये
तकल्लुफ़
है
जिसे
तू
जानता
है
खो
चुका
जाने
कहाँ
वो
लड़का
पागल
क्या
अभी
भी
तू
उसे
पहचानता
है
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Kalamkash
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पीता
नहीं
मगर
मुझे
आदत
अजीब
है
कहता
हूँ
मैं
जहाँ
से
मुहब्बत
अजीब
है
Kalamkash
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इन
आँखों
में
रौशन
रौशन
कोई
ख़्वाब
झलकता
है
इन
बातों
में
देखो
जैसे
कोई
राज़
खटकता
है
लहजे
में
एक
जुस्तजू
सीने
में
बेचैनी
सी
है
मेरा
ग़म
तो
मेरा
है
तू
क्यूँ
महताब
सिसकता
है
इन
कूचों
में
काम
तिरा
क्या
इन
गलियों
से
क्या
रिश्ता
पागल
पागल
आवारा
सा
क्यूँ
बे-नाम
भटकता
है
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Kalamkash
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तरावत
जो
दीदों
में
है
आप
उस
से
ये
तरतीब
फिर
से
सजा
लीजे
जानाँ
Kalamkash
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क़ुर्बान
करूँँ
इश्क़
कभी
इश्क़
की
ख़ातिर
हसरत
है
लुटा
दूँ
मैं
सभी
इश्क़
की
ख़ातिर
Kalamkash
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