meri ulfat zar-e-qeemat nahin hone waali | मेरी उलफ़त ज़र-ए-क़ीमत नहीं होने वाली

  - Kaif Uddin Khan
मेरीउलफ़तज़र-ए-क़ीमतनहींहोनेवाली
इश्क़मेंकोईतिजारतनहींहोनेवाली
मेरेहिस्सेमेंफ़क़तएकदिल-ए-ख़ाना-ख़राब
उसपेभीमुझसेेहुकूमतनहींहोनेवाली
मैंनेरक्खाहैउसेबाम-ए-फ़लकज़ेर-ए-ज़मीं
औरअमानतमेंख़यानतनहींहोनेवाली
लोगएहसानउठातेहैंमुहब्बतमेंमगर
कुछभीहमसेेतेरीख़िदमतनहींहोनेवाली
एकगुलसाराचमनतोनहींमहकासकता
एकवोसबकीसुहूलतनहींहोनेवाली
रखनेकोरखतोदियाहैउसेबुत-ख़ानेमें
परयहाँउसकीइबादतनहींहोनेवाली
मुझपेउतराहैसहीफ़ाजोतेरीउलफ़तका
उसकीभीमुझसेेतिलावतनहींहोनेवाली
  - Kaif Uddin Khan
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