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Saurabh Yadav Kaalikhh
kaho yaar kalikh ki kya hi karoge
kaho yaar kalikh ki kya hi karoge | कहो यार 'कालिख़' कि क्या ही करोगे
- Saurabh Yadav Kaalikhh
कहो
यार
'कालिख़'
कि
क्या
ही
करोगे
मुसलसल
करेंगे
सफ़र
ज़िंदगी
भर
- Saurabh Yadav Kaalikhh
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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क्यूँ
डरें
ज़िन्दगी
में
क्या
होगा
कुछ
न
होगा
तो
तजरबा
होगा
Javed Akhtar
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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लड़े
लोग
मज़हब
बचाने
को
जब
इधर
कोई
भागा
उधर
कट
गया
Saurabh Yadav Kaalikhh
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यहाँ
चेहरे
सभी
जैसे
भरी
‘कालिख़’
बचे
कुछ
साफ़
उन
में
रंग
भरने
दो
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Saurabh Yadav Kaalikhh
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न
तारीख़
बदली
न
ही
हाल
बदला
न
बदली
अदाऍं
न
ये
साल
बदला
मेरा
शहर
बदला
मेरा
गाँव
बदला
न
ही
लोग
बदले
न
सुरताल
बदला
सड़क
भर
गई
लोग
हैं
अब
ज़ियादा
फ़लक
में
परिंदों
ने
क्यूँँ
हाल
बदला
समुंदर
किनारा
टहलते
जिगर
हम
दिया
था
मुझे
जो
न
रूमाल
बदला
बहुत
प्यार
से
यार
भेजी
है
तुमको
ख़बरदार
जो
मख़मली
शाॅल
बदला
चलो
इम्तिहाँ
बस
करो
मान
जाओ
न
कालिख़
न
लिखना
न
ही
काल
बदला
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Saurabh Yadav Kaalikhh
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मुझे
था
लगा
सब
सही
चल
रहा
सही
चल
रहा
था
मगर
कट
गया
मेरा
था
कभी
कट
चुका
इसलिए
न
फिर
से
कटेगा
मगर
कट
गया
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Saurabh Yadav Kaalikhh
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बँटे
मुल्क
मज़हब
के
ही
वास्ते
बहा
ख़ूँ
सभी
का
जो
मर
कट
गया
Saurabh Yadav Kaalikhh
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