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Saurabh Yadav Kaalikhh
guzarte guzarte kisi roz phir tum
guzarte guzarte kisi roz phir tum | गुज़रते गुज़रते किसी रोज़ फिर तुम
- Saurabh Yadav Kaalikhh
गुज़रते
गुज़रते
किसी
रोज़
फिर
तुम
कहोगे
कि
रहना
है
घर
ज़िंदगी
भर
- Saurabh Yadav Kaalikhh
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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वो
मेरे
घर
नहीं
आता
मैं
उस
के
घर
नहीं
जाता
मगर
इन
एहतियातों
से
त'अल्लुक़
मर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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इन
का
उठना
नहीं
है
हश्र
से
कम
घर
की
दीवार
बाप
का
साया
Unknown
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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उम्र
भर
वो
दूसरों
की
ही
बनाता
था
छतें
ऐ
ख़ुदा
मज़दूर
की
दीवार
पक्की
क्यूँँ
नहीं
Saurabh Yadav Kaalikhh
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किया
बस
इधर
से
उधर
ज़िंदगी
भर
भटकते
रहे
दर
बदर
ज़िंदगी
भर
Saurabh Yadav Kaalikhh
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रूह
सारी
सर
ख़ुशी
से
छोड़ती
सारे
बदन
सोगवारी
बेवजह
सारी
यहाँ
घर
घर
चले
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Saurabh Yadav Kaalikhh
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न
तारीख़
बदली
न
ही
हाल
बदला
न
बदली
अदाऍं
न
ये
साल
बदला
मेरा
शहर
बदला
मेरा
गाँव
बदला
न
ही
लोग
बदले
न
सुरताल
बदला
सड़क
भर
गई
लोग
हैं
अब
ज़ियादा
फ़लक
में
परिंदों
ने
क्यूँँ
हाल
बदला
समुंदर
किनारा
टहलते
जिगर
हम
दिया
था
मुझे
जो
न
रूमाल
बदला
बहुत
प्यार
से
यार
भेजी
है
तुमको
ख़बरदार
जो
मख़मली
शाॅल
बदला
चलो
इम्तिहाँ
बस
करो
मान
जाओ
न
कालिख़
न
लिखना
न
ही
काल
बदला
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Saurabh Yadav Kaalikhh
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भला
क्या
करेगा
अगर
कट
गया
उड़ा
था
परिंदा
कि
पर
कट
गया
कई
साल
वो
छाँव
देता
रहा
कड़ी
धूप
में
फिर
शजर
कट
गया
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Saurabh Yadav Kaalikhh
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