kiya bas idhar se udhar zindagi bhar | किया बस इधर से उधर ज़िंदगी भर

  - Saurabh Yadav Kaalikhh
कियाबसइधरसेउधरज़िंदगीभर
भटकतेरहेदर-ब-दरज़िंदगीभर
किसीनेलगायागलेमौतकोभी
झुकायानहींहमनेसरज़िंदगीभर
गएथेकमानेसभीख़्वाबरखकर
आएकभीलौटघरज़िंदगीभर
ख़ुदाऔरकितनारहूँमैंपरेशाँ
क़यामतरहीहमसेफ़रज़िंदगीभर
हमेंकौनकुछदेगयाहैयहाँपर
कमाकरकियाहैगुज़रज़िंदगीभर
मुझेमौततकमारपाईलेकिन
किसीनेछोड़ीक़सरज़िंदगीभर
किसेहमबताएँकिइसनौकरीने
रुलायाहमेंइसक़दरज़िंदगीभर
कहोयार'कालिख़'किक्याहीकरोगे
मुसलसलकरेंगेसफ़रज़िंदगीभर
  - Saurabh Yadav Kaalikhh
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