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Meem Alif Shaz
udaasi kaun laaya hai mire ghar
udaasi kaun laaya hai mire ghar | उदासी कौन लाया है मिरे घर
- Meem Alif Shaz
उदासी
कौन
लाया
है
मिरे
घर
मिरा
भाई
मुझी
से
अब
ख़फ़ा
है
- Meem Alif Shaz
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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मैं
अँधेरों
से
बचा
लाया
था
अपने
आप
को
मेरा
दुख
ये
है
मिरे
पीछे
उजाले
पड़
गए
Rahat Indori
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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जिसे
जो
जी
में
आता
है
सो
लिखता
है
बड़ा
मुश्किल
है
कह
पाना
क़लम
का
दुख
Harsh saxena
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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घर
चलाने
के
लिए
क्या
बन
गया
सोने
से
मैं
कोई
काँसा
बन
गया
दोस्ती
में
इश्क़
भी
होने
लगा
रस्ते
में
इक
और
रस्ता
बन
गया
ग़म
ने
इतनी
बार
तोड़ा
है
मुझे
मुझ
को
लगता
है
मैं
धागा
बन
गया
हुस्न
पे
इतराता
था
दरिया
बहुत
इस
क़दर
सूखा
कि
गड्ढा
बन
गया
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Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी
तुझ
को
न
जी
पाए
हम
वक़्त
ने
दर्द
दिया
जब
इतना
Meem Alif Shaz
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मैं
परिंदा
तो
नहीं
जो
कुछ
न
बोलूँगा
कभी
मैं
समुंदर
हूँ
न
रोकेंगी
मुझे
पाबंदियाँ
Meem Alif Shaz
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ख़ुद-कुशी
कर
के
उस
को
दवा
मिल
गई
घर
के
लोगों
को
लेकिन
सज़ा
मिल
गई
Meem Alif Shaz
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मेरा
दिल
एक
छोटा
शजर
ही
तो
है
पाँव
मत
रखना
काग़ज़
का
घर
ही
तो
है
Meem Alif Shaz
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