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Meem Alif Shaz
tum bewafaai nahin kar sakti magar chahti ho
tum bewafaai nahin kar sakti magar chahti ho | तुम बेवफ़ाई नहीं कर सकती मगर चाहती हो
- Meem Alif Shaz
तुम
बेवफ़ाई
नहीं
कर
सकती
मगर
चाहती
हो
हम
भी
वफ़ाई
नहीं
कर
सकते
मगर
चाहते
हैं
- Meem Alif Shaz
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'शाद'
ग़ैर-मुमकिन
है
शिकवा-ए-बुताँ
मुझ
से
मैं
ने
जिस
से
उल्फ़त
की
उस
को
बा-वफ़ा
पाया
Shaad Arfi
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बेशक़
तू
बे-वफ़ा
का
सनम
नाम
दे
मुझे
बाद
आज़माने
के
मगर
इल्ज़ाम
दे
मुझे
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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कटी
उम्र
सारी
वफ़ा
करते
करते
किसी
की
मुहब्बत
अदा
करते
करते
वो
थकता
नहीं
है
ज़फा
करते
करते
मैं
थकती
नहीं
हूँ
दु'आ
करते
करते
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Shadab Asghar
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डरा-धमका
के
तुम
हम
सेे
वफ़ा
करने
को
कहते
हो
कहीं
तलवार
से
भी
पाँव
का
काँटा
निकलता
है
Munawwar Rana
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हमको
तो
प्यार
चाहिए
था
तेरा
प्यार
सिर्फ़
इस
बात
से
वफ़ा
का
कोई
वास्ता
नहीं
Vikas Rajput
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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वफ़ा
जिस
से
की
बे-वफ़ा
हो
गया
जिसे
बुत
बनाया
ख़ुदा
हो
गया
Hafeez Jalandhari
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वो
करेंगे
वस्ल
का
वा'दा
वफ़ा
रंग
गहरे
हैं
हमारी
शाम
के
Muztar Khairabadi
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वफ़ा
का
अहद
था
दिल
को
सँभालने
के
लिए
वो
हँस
पड़े
मुझे
मुश्किल
में
डालने
के
लिए
Ehsan Danish
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गाँव
भी
छोड़ा,
इश्क़
भी
छोड़ा,
माँ
भी
छोड़ी
इस
रोज़ी
की
ख़ातिर
हम
ने
क्या
क्या
छोड़ा
Meem Alif Shaz
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हम
किसे
साथ
में
रखते
किस
को
अलग
पहली
या
दूसरी
दोनों
ही
दिल
में
थीं
Meem Alif Shaz
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तेरी
आँखों
में
मैं
रहता
हूँ
वरना
इन
भूरी
आँखों
में
बस
पानी
होता
Meem Alif Shaz
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घर
से
बाहर
जाने
में
तो
ख़तरा
है
जब
तक
घर
में
हैं
शिकवे
जला
देते
हैं
Meem Alif Shaz
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तिरी
आँखों
से
हम
को
इक
शिकायत
है
ये
बाहर
आने
का
मौक़ा
नहीं
देतीं
Meem Alif Shaz
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