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Meem Alif Shaz
rahne do ik raushandaan to baqi
rahne do ik raushandaan to baqi | रहने दो इक रौशनदान तो बाक़ी
- Meem Alif Shaz
रहने
दो
इक
रौशनदान
तो
बाक़ी
थोड़ी
धूप
मुझे
भी
तो
लेने
दो
- Meem Alif Shaz
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रुकें
तो
धूप
से
नज़रें
बचाते
रहते
हैं
चलें
तो
कितने
दरख़्त
आते
जाते
रहते
हैं
Charagh Sharma
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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धूप
निकली
है
बारिशों
के
ब'अद
वो
अभी
रो
के
मुस्कुराए
हैं
Anjum Ludhianvi
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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मिरी
रौशनी
तिरे
ख़द्द-ओ-ख़ाल
से
मुख़्तलिफ़
तो
नहीं
मगर
तू
क़रीब
आ
तुझे
देख
लूँ
तू
वही
है
या
कोई
और
है
Saleem Kausar
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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वो
जो
नाराज़
था
मेरे
सच
से
बेहद
कमज़र्फ़
था
हक़ीक़त
में
Meem Alif Shaz
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तुम
ने
उस
की
सिर्फ़
आँखों
को
बनाया
हम
ने
उन
में
ख़ूब
काजल
भी
लगाया
Meem Alif Shaz
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इक
तिहाई
ज़िंदगी
दुकान
में
गुज़र
गई
जो
बची
थी
मौत
के
ही
ध्यान
में
गुज़र
गई
ख़्वाब
तो
हमारे
भी
थे
आसमाँ
को
छूने
के
पर
जवानी
कितने
इम्तिहान
में
गुज़र
गई
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Meem Alif Shaz
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भूख
से
जब
इक
छोटा
बच्चा
रोया
माँ
ने
उस
को
खिलौनों
से
बहलाया
Meem Alif Shaz
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मुझे
अहसास
है
उन
ग़लतियों
का
मगर
हो
जाती
हैं
मजबूरियों
में
Meem Alif Shaz
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