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Meem Alif Shaz
meri khidki ke hoton pe
meri khidki ke hoton pe | मेरी खिड़की के होटों पे
- Meem Alif Shaz
मेरी
खिड़की
के
होटों
पे
धूप
की
बस
इक
बूँद
गिरी
है
- Meem Alif Shaz
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मुख़्तसर
होते
हुए
भी
ज़िन्दगी
बढ़
जाएगी
माँ
की
आँखें
चूम
लीजे
रौशनी
बढ़
जाएगी
Munawwar Rana
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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अभी
रौशन
हुआ
जाता
है
रस्ता
वो
देखो
एक
औरत
आ
रही
है
Shakeel Jamali
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तेज़
धूप
में
आई
ऐसी
लहर
सर्दी
की
मोम
का
हर
इक
पुतला
बच
गया
पिघलने
से
Qateel Shifai
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जिस
किसी
से
तेरा
चक्कर
चल
रहा
था
उसको
मैं
अच्छी
तरह
से
जानता
था
रातें
रौशन
थी
किसी
की
तुझ
सेे
दिलबर
तो
किसी
का
तेरे
बा'इस
रत-जगा
था
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Dileep Kumar
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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रोशनी
बढ़ने
लगी
है
शहर
की
चाँद
छत
पर
आ
गया
है
देखिए
Divy Kamaldhwaj
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जली
हैं
धूप
में
शक्लें
जो
माहताब
की
थीं
खिंची
हैं
काँटों
पे
जो
पत्तियाँ
गुलाब
की
थीं
Dagh Dehlvi
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वो
सर्दियों
की
धूप
की
तरह
ग़ुरूब
हो
गया
लिपट
रही
है
याद
जिस्म
से
लिहाफ़
की
तरह
Musavvir Sabzwari
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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जिस
ने
रिश्तों
को
समझा
ही
नहीं
उस
ने
ख़ुद
को
पहचाना
ही
नहीं
Meem Alif Shaz
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अचानक
से
चले
जाते
हैं
जो
कुछ
लोग
बहारों
में
ख़िज़ाँ
को
छोड़
जाते
हैं
Meem Alif Shaz
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तेरी
तस्वीर
देख
के
आँखें
देखती
हैं
इधर
उधर
तुझ
को
Meem Alif Shaz
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चाय
कपड़ों
पे
न
गिरने
देना
साहिब
आदमी
बदनाम
हो
जाता
है
यूँँही
Meem Alif Shaz
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ख़बर
है
मुझ
को
इक
फ़नकार
मुझ
में
है
मगर
हालात
की
बौछार
मुझ
में
है
बुराई
मुझ
को
भी
बेज़ार
कर
देती
मगर
ईमान
की
तलवार
मुझ
में
है
दु'आ
से
बारिशें
तो
हो
नहीं
सकती
गुनाहों
का
भी
जब
भंडार
मुझ
में
है
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Meem Alif Shaz
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