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Meem Alif Shaz
late jaaunga main teri baahon ko bistar banaakar
late jaaunga main teri baahon ko bistar banaakar | लेट जाऊँगा मैं तेरी बाहों को बिस्तर बनाकर
- Meem Alif Shaz
लेट
जाऊँगा
मैं
तेरी
बाहों
को
बिस्तर
बनाकर
धूप
आएगी
तो
तेरी
ज़ुल्फ़ों
को
चादर
बनाकर
देखना
है
यह
ज़माना
मुझ
को
कितना
पूजता
है
घर
के
बाहर
मैं
रखूँगा
अपना
इक
पैकर
बनाकर
- Meem Alif Shaz
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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अभी
रौशन
हुआ
जाता
है
रस्ता
वो
देखो
एक
औरत
आ
रही
है
Shakeel Jamali
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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लड़कियाँ
बैठी
थीं
पाँव
डालकर
रौशनी
सी
हो
गई
तालाब
में
Parveen Shakir
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तारीकियों
को
आग
लगे
और
दिया
जले
ये
रात
बैन
करती
रहे
और
दिया
जले
उस
की
ज़बाँ
में
इतना
असर
है
कि
निस्फ़
शब
वो
रौशनी
की
बात
करे
और
दिया
जले
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Tehzeeb Hafi
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जली
हैं
धूप
में
शक्लें
जो
माहताब
की
थीं
खिंची
हैं
काँटों
पे
जो
पत्तियाँ
गुलाब
की
थीं
Dagh Dehlvi
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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घर
में
ठंडे
चूल्हे
पर
अगर
ख़ाली
पतीली
है
बताओ
कैसे
लिख
दूँ
धूप
फागुन
की
नशीली
है
Adam Gondvi
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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होली
है
या
फिर
फूलों
का
मौसम
है
सब
के
चेहरों
पे
रंग
है
ख़ुशबू
भी
है
Meem Alif Shaz
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हमारे
घुटनों
में
भी
दर्द
हो
गया
लेकिन
नहीं
किए
किसी
ने
दस्तख़त
भी
काग़ज़
पे
Meem Alif Shaz
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मेरी
बीमारी
घर
से
बाहिर
कैसे
जाए
लोगों
ने
ऐसी
वैसी
बातें
जो
बनाई
हैं
Meem Alif Shaz
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अलग
रहना
बड़ा
मुश्किल
सफ़र
है
मोहब्बत
की
यही
तो
ख़ासियत
है
Meem Alif Shaz
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लोग
तो
चाँद
को
भी
चुरा
लें
मगर
उनके
हाथों
की
लम्बाई
इतनी
नहीं
Meem Alif Shaz
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