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Meem Alif Shaz
kya mila hai is tarah hushyaar hokar
kya mila hai is tarah hushyaar hokar | क्या मिला है इस तरह हुशयार होकर
- Meem Alif Shaz
क्या
मिला
है
इस
तरह
हुशयार
होकर
आज
मेरी
राह
में
दीवार
होकर
अब
कहाँ
है
ग़ुस्सा
तेरा
ज़ुल्म
तेरा
अब
तो
हिलता
भी
नहीं
बीमार
होकर
- Meem Alif Shaz
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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ज़माना
ज़ुल्म
करता
है
ख़ुशी
से
कभी
तुझ
को
कभी
मुझ
को
सताए
Meem Alif Shaz
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दुश्मनों
की
जफ़ा
का
ख़ौफ़
नहीं
दोस्तों
की
वफ़ा
से
डरते
हैं
Hafeez Banarasi
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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मेरी
आँखों
को
रोने
का
हुनर
नहीं
आता
जिस
का
भी
कोई
ग़म
देखे
छलक
जाती
हैं
Meem Alif Shaz
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इस
से
मैं
मोहब्बत
कर
लूँ
सोच
रहा
हूँ
मैं
यह
रौशनी
दिल
में
भर
लूँ
सोच
रहा
हूँ
मैं
कोई
दवा
मेरे
ज़ख़्मों
को
नहीं
मिल
पाई
मैं
ज़ख़्मों
को
ही
घर
कर
लूँ
सोच
रहा
हूँ
मैं
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Meem Alif Shaz
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अमानत
में
ख़यानत
लुत्फ़
देती
है
मगर
इज़्ज़त
भी
सारी
छीन
लेती
है
Meem Alif Shaz
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तेरी
यादों
में
ऐसे
तड़पता
हूँ
मैं
कमरे
में
चीख़
पड़ती
है
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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मैं
समुंदर
को
बहुत
हैरान
कर
के
लौटा
हूँ
ख़ुद-कुशी
करनी
नहीं
ऐलान
कर
के
लौटा
हूँ
अपनी
सारी
उलझनों
को
फेंक
आया
हूँ
वहीं
ज़िन्दगी
अपनी
बहुत
आसान
कर
के
लौटा
हूँ
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Meem Alif Shaz
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