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Meem Alif Shaz
kaash yah uljhane nahin hoti
kaash yah uljhane nahin hoti | काश यह उलझनें नहीं होती
- Meem Alif Shaz
काश
यह
उलझनें
नहीं
होती
काश
वो
ज़िन्दगी
यहीं
होती
- Meem Alif Shaz
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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हर
एक
काम
है
धोका
हर
एक
काम
है
खेल
कि
ज़िंदगी
में
तमाशा
बहुत
ज़रूरी
है
Khaleel Mamoon
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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मुझे
मिलने
नहीं
देती
शिकायत
कभी
तू
हाल
पूछे
तो
मिले
हम
Meem Alif Shaz
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तुझ
को
जाना
है
तो
जा
सकता
है
फिर
से
मेरे
दिल
को
दुखा
सकता
है
लेकिन
याद
रहे
जाने
से
पहले
दिल
में
कोई
और
भी
आ
सकता
है
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Meem Alif Shaz
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पहले
क्या
थे
और
अब
क्या
हो
गए
लोग
अपने
कर्मों
से
तमाशा
हो
गए
लोग
बंदगी
पहले
भी
तो
होती
थी
लेकिन
अब
दु'आओं
से
मसीहा
हो
गए
लोग
इश्क़
भी
करने
नहीं
देते
करे
क्या
तन्हा
रहते
रहते
सहरा
हो
गए
लोग
शाज़
तू
भी
उनके
जैसा
मत
हो
जाना
वो
जो
चिड़ने
से
धुआँ
सा
हो
गए
लोग
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Meem Alif Shaz
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तू
बिन
बुलाए
आया
नहीं
था
सो
देख
ली
अब
तेरी
मोहब्बत
Meem Alif Shaz
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अपनी
शोहरत
पे
तू
कर
न
इतना
ग़ुरूर
रेत
का
टीला
इक
दम
बिखर
जाता
है
Meem Alif Shaz
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