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Meem Alif Shaz
in aankhoñ ke dareechon pe khaabo ka hona
in aankhoñ ke dareechon pe khaabo ka hona | इन आँखों के दरीचों पे ख़्वाबों का होना
- Meem Alif Shaz
इन
आँखों
के
दरीचों
पे
ख़्वाबों
का
होना
साँस
निकल
ने
पे
भी
उन
का
ज़िंदा
होना
- Meem Alif Shaz
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तुम्हारे
बाद
के
बोसों
में
जानाँ
तुम्हारी
सांस
की
ख़ुशबू
नहीं
थी
Vikas Rana
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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भले
ही
जान-लेवा
हो
सियासत
को
ग़लत
कहना
मगर
फिर
भी
ये
सच
ईमान
वाले
लोग
कहते
हैं
Amaan Pathan
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खाक
हो
जाएँगे
हम
खाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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तुझको
चूमा
तो
समझ
आया
मुझे
क्यूँँ
तेरे
बिन
साँस
भी
आती
न
थी
Siddharth Saaz
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ले
साँस
भी
आहिस्ता
कि
नाज़ुक
है
बहुत
काम
आफ़ाक़
की
इस
कारगह-ए-शीशागरी
का
Meer Taqi Meer
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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रात
अपनी
तन्हाई
को
देखा
था
मेरे
कपड़ों
में
अकेली
बैठी
थी
Meem Alif Shaz
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मैं
तो
अकसर
इतना
बिखर
जाता
हूँ
रोते
रोते
ख़ुदस
डर
जाता
हूँ
मेरे
अंदर
सन्नाटा
थर
थर
करता
है
ऐसी
ख़मोशी
से
मैं
गुज़र
जाता
हूँ
ख़ुदस
वादे
करता
हूँ
हँसने
के
लेकिन
डर
के
मारे
मुकर
जाता
हूँ
हर
इक
ख़्वाब
अधूरा
रह
जाता
है
फिर
मायूसी
लेकर
घर
जाता
हूँ
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Meem Alif Shaz
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हमारी
सरहदों
की
ज़िन्दगी
भी
बशर
की
चाहतों
ने
छीन
ली
है
Meem Alif Shaz
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माना
हम
भटके
हुए
हैं
रस्ते
से
रूह
तो
लेकिन
फ़रिश्तों
वाली
है
Meem Alif Shaz
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हम
कभी
रोते
नहीं
जब
याद
तेरी
आती
है
तू
यक़ीनन
लौट
के
आएगी
मौसम
की
तरह
Meem Alif Shaz
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