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Meem Alif Shaz
har koii hairat men hai har koii KHush bhi to hai
har koii hairat men hai har koii KHush bhi to hai | हर कोई हैरत में है हर कोई ख़ुश भी तो है
- Meem Alif Shaz
हर
कोई
हैरत
में
है
हर
कोई
ख़ुश
भी
तो
है
बाज़ारों
में
उतर
आए
हैं
ये
महताब
कहाँ
से
- Meem Alif Shaz
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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मुझको
गया
था
छोड़
के
वो
कितने
तैश
में
लेकिन
ख़ुशी
से
रह
न
सका
एक
साल
भी
Ankit Maurya
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तेरे
सिवा
भी
कई
रंग
ख़ुश
नज़र
थे
मगर
जो
तुझको
देख
चुका
हो
वो
और
क्या
देखे
Parveen Shakir
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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दफ्न
ताबूत
में
कर
तिरी
हर
ख़ुशी
जश्न
कैसे
मनाते
है
मय्यत
पे
भी
ख़ास
तारीख़
थी
इम्तिहाँ
की
मगर
आज
बारात
उसकी
बुला
ली
गई
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Shilpi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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बाक़ी
नहीं
रहा
है
कोई
रब्त
शहरस
यानी
कि
ख़ुश
रहेंगे
यहाँ
ख़ुश
रहे
बग़ैर
pankaj pundir
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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उस
के
घर
में
भी
बच्चे
खेलें
उस
ने
यह
सोचा
था
लेकिन
कम
रोज़ी
की
वजह
से
उस
ने
ख़ुद
को
रोका
था
Meem Alif Shaz
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उनकी
आँखें
सब
को
मज़ा
देती
हैं
हौले
से
फिर
सब
को
सज़ा
देती
हैं
Meem Alif Shaz
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ठीक
है
उस
ने
देखा
नहीं
था
मगर
उस
को
तो
चुपके
से
ही
गुज़र
जाना
था
कब
तलक
रहता
दुनिया
की
रौनक़
में
वो
एक
दिन
तो
उसे
भी
यूँँ
मर
जाना
था
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Meem Alif Shaz
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तुम
भी
बढ़ो
अपनी
मंज़िल
की
जानिब
यह
क़िस्मत
भी
फिर
खुल
ही
जाएगी
Meem Alif Shaz
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मैं
अपने
घर
से
तन्हा
जा
रहा
हूँ
दुआएँ
कर
के
तोड़ा
जा
रहा
हूँ
कभी
दीवार
होने
ही
नहीं
दी
सो
भाई
को
मैं
खलता
जा
रहा
हूँ
बिखर
जाऊँ
ज़माना
चाहता
है
मगर
मैं
ऊँचा
बनता
जा
रहा
हूँ
जो
बुझता
ही
नहीं
शातिर
हवा
से
मैं
वो
ही
शम्स
होता
जा
रहा
हूँ
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Meem Alif Shaz
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