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Meem Alif Shaz
ha
ha | हमें इक बार तुम आवाज़ तो दो
- Meem Alif Shaz
हमें
इक
बार
तुम
आवाज़
तो
दो
हमारे
इश्क़
को
आग़ाज़
तो
दो
तुम्हारे
हुस्न
की
तारीफ़
होगी
कभी
इस
हुस्न
को
अंदाज़
तो
दो
- Meem Alif Shaz
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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इश्क़
तिरी
इंतिहा
इश्क़
मिरी
इंतिहा
तू
भी
अभी
ना-तमाम
मैं
भी
अभी
ना-तमाम
Allama Iqbal
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बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
जान-ए-
मन
बाक़ी
सब
जज़्बात
का
इज़हार
कम
कर
दीजिए
Farhat Ehsaas
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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हाए
वो
इश्क़
छुपाने
के
ज़माने
'मोहन'
याद
आता
है
ग़लत
नाम
से
नंबर
रखना
Balmohan Pandey
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याद
रखना
ही
मोहब्बत
में
नहीं
है
सब
कुछ
भूल
जाना
भी
बड़ी
बात
हुआ
करती
है
Jamal Ehsani
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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अब
के
फूल
गिरेंगे
उस
की
ज़ुबाँ
से
हम
ने
ऐसा
सोचा
है
जो
हम
ने
सोचा
है
उस
ने
भी
सोचा
होगा
तो
क्या
होगा
Meem Alif Shaz
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में
थकने
वाला
नहीं,
तू
ये
बात
जान
ले
मेरी
टीचर
ज़िन्दगी,
तू
ये
बात
मान
ले
Meem Alif Shaz
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मीर
जैसा
दर्द
है
तो
रोज़
ही
मरते
हैं
हम
तुम
ज़रा
छूकर
तो
देखो
किस
क़दर
डरते
हैं
हम
हम
पे
कोई
तीर
ताना
ही
नहीं
अच्छा
किया
वरना
हर
इक
ज़ख़्म
में
बस
ज़ख़्म
ही
भरते
हैं
हम
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Meem Alif Shaz
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तुझ
को
कैसे
उठाएँ
यह
तो
बता
तू
नज़रों
से
गिरा
है
पी
के
नहीं
Meem Alif Shaz
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तुम
चलते
चलते
क्यूँ
रुक
जाते
हो
अपने
ग़म
को
बाहर
क्यूँ
लाते
हो
जब
उम्मीद
नहीं
उस
के
आने
की
हर
वादे
से
ठोकर
क्यूँ
खाते
हो
जब
दुनिया
सुनती
ही
नहीं
ख़ामोशी
तुम
इतनी
ख़ामोशी
क्यूँ
गाते
हो
शीशे
से
बातें
करते
हो
लेकिन
मेरे
लिए
पत्थर
क्यूँ
बन
जाते
हो
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Meem Alif Shaz
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