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Meem Alif Shaz
ghar par jaayen to kaise jaayen ham
ghar par jaayen to kaise jaayen ham | घर पर जाएँ तो कैसे जाएँ हम
- Meem Alif Shaz
घर
पर
जाएँ
तो
कैसे
जाएँ
हम
बच्चे
फिर
पूछेंगे
क्या
लाए
हो
- Meem Alif Shaz
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उस
को
रुख़्सत
तो
किया
था
मुझे
मालूम
न
था
सारा
घर
ले
गया
घर
छोड़
के
जाने
वाला
Nida Fazli
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अजब
अंदाज़
से
ये
घर
गिरा
है
मिरा
मलबा
मिरे
ऊपर
गिरा
है
Aanis Moin
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उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वालों
सुन
लो
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
Shaad Imran
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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तुम
भी
आईनो
में
थोड़े
से
पथ्थर
रखना
जब
पथ्थर
आए
थोड़ी
सी
हिफ़ाज़त
हो
जाए
Meem Alif Shaz
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अगर
तू
मिल
न
पाती
तो
क्या
होता
तिरी
तस्वीर
से
ही
दिल
लगाते
Meem Alif Shaz
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जो
अपनी
कमियाँ
गिनते
हैं
तन्हाई
में
उन
लोगों
को
अच्छाई
ही
नज़र
आती
है
Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
में
भी
रंजिश
हो
रही
है
मिरी
आँखों
से
बारिश
हो
रही
है
बहुत
ही
बढ़
गए
हैं
जुर्म
सब
के
ज़मीनों
में
तो
जुम्बिश
हो
रही
है
बहारें
इतनी
दिलकश
हैं
कि
इस
बार
मुलाक़ातों
की
ख़्वाहिश
हो
रही
है
ज़रा
सा
पैसा
आते
ही
यहाँ
तो
तकब्बूर
की
नुमाइश
हो
रही
है
दुआएँ
रंग
लाती
ही
नहीं
अब
कहीं
तो
हम
से
लग़्ज़िश
हो
रही
है
हवाएँ
तो
अभी
तक
खिड़की
पे
थी
मगर
अब
घर
से
साज़िश
हो
रही
है
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Meem Alif Shaz
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कब्र
तक
ही
साथ
था
लेकिन
न
जाने
ज़िन्दगी
कैसे
बसर
होगी
अकेले
Meem Alif Shaz
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