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Meem Alif Shaz
aadmi ko bas ik hi shaKHs pe bharosa hai
aadmi ko bas ik hi shaKHs pe bharosa hai | आदमी को बस इक ही शख़्स पे भरोसा है
- Meem Alif Shaz
आदमी
को
बस
इक
ही
शख़्स
पे
भरोसा
है
जो
उसी
के
अंदर
गुमनाम
सा
हमेशा
है
- Meem Alif Shaz
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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इश्क़
ने
'ग़ालिब'
निकम्मा
कर
दिया
वर्ना
हम
भी
आदमी
थे
काम
के
Mirza Ghalib
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गिरजा
में
मंदिरों
में
अज़ानों
में
बट
गया
होते
ही
सुब्ह
आदमी
ख़ानों
में
बट
गया
Nida Fazli
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देख
कर
इंसान
की
बेचारगी
शाम
से
पहले
परिंदे
सो
गए
Iffat Zarrin
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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इत्तिफ़ाक़
अपनी
जगह
ख़ुश-क़िस्मती
अपनी
जगह
ख़ुद
बनाता
है
जहाँ
में
आदमी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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बस
एक
मैं
था
जिस
सेे
सच
मुच
में
दिलबरी
की
वरना
हर
आदमी
से
उसने
दो
नंबरी
की
जिस
बात
में
भी
हमने
ख़ुद
को
अकेला
रक्खा
बाग़ात
में
भी
हमने
जोड़ों
की
मुख़बरी
की
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Muzdum Khan
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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ज़ुबाँ
अपनी
सदाक़त
से
भरो
तुम
ज़माना
झूठ
से
तंग
आ
गया
है
Meem Alif Shaz
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मेरे
ज़ख़्मों
की
तस्वीर
बना
दो
मेरी
भी
अच्छी
तक़दीर
बना
दो
ऊपर
लिख
दो
अपनी
अपनी
क़िस्मत
नीचे
पैरों
में
जंज़ीर
बनादो
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Meem Alif Shaz
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उस
का
नाज़ुक
दिल
हम
भी
तोड़ें
तौबा
तौबा
उस
को
उल्टे
रस्ते
पे
छोड़ें
तौबा
तौबा
हम
ने
उस
की
मोहब्बत
की
तारीफ़
बहुत
की
है
अब
उस
से
यह
रिश्ता
नहीं
जोड़ें
तौबा
तौबा
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Meem Alif Shaz
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पाँव
से
काँटा
जब
हम
निकालेंगे
'शाज़'
लोग
आएँगे
तब
देखने
के
लिए
Meem Alif Shaz
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उम्र
भर
चाहा
पर
उस
को
पाया
नहीं
अपने
ग़म
को
लबों
पे
सजाया
नहीं
मिलने
तो
आया
है
वो
बहुत
दूर
से
साथ
अपने
मगर
ख़ुद
को
लाया
नहीं
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Meem Alif Shaz
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