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Meem Alif Shaz
agar ko aise na giraaya kar
agar ko aise na giraaya kar | ज़ुल्फ़ों को ऐसे न गिराया कर
- Meem Alif Shaz
ज़ुल्फ़ों
को
ऐसे
न
गिराया
कर
बादल
बनके
न
मुस्कुराया
कर
तेरा
भाई
कुछ
है
तेरा
शायद
रिश्तों
को
मरने
से
बचाया
कर
मुश्किल
है,
जो
है
पास
मंज़िल
रुक-रुक
कर
ख़ुद
को
न
थकाया
कर
ये
तारें
ये
मन्ज़र
ख़ुदा
के
हैं
अपने
बच्चों
को
भी
बताया
कर
ये
ख़ामोशी
अच्छी
नहीं
होंठों
पर
मेरी
ग़ज़लों
को
गुनगुनाया
कर
शब
में
सजता
है
चाँद
महबूबा
तू
आँखों
में
काजल
लगाया
कर
- Meem Alif Shaz
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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और
उसको
ढूढ़ता
मैं
किस
जगह
पास
ही
थी
और
कितनी
दूर
थी
Umesh Maurya
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गिला
भी
तुझ
से
बहुत
है
मगर
मोहब्बत
भी
वो
बात
अपनी
जगह
है
ये
बात
अपनी
जगह
Basir Sultan Kazmi
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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जो
तुम्हें
मंज़िल
पे
ले
जाएँगी
वो
राहें
अलग
हैं
मैं
वो
रस्ता
हूँ
कि
जिस
पर
तुम
भटक
कर
आ
गई
हो
Harman Dinesh
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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इस
क़दर
झूठ
वो
बोलता
है
कि
बस
इस
क़दर
वादों
में
डोलता
है
कि
बस
बात
करता
है
ईमानदारी
मगर
दूध
में
इतना
जल
घोलता
है
कि
बस
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Meem Alif Shaz
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में
थकने
वाला
नहीं,
तू
ये
बात
जान
ले
मेरी
टीचर
ज़िन्दगी,
तू
ये
बात
मान
ले
Meem Alif Shaz
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डूबना
है
तो
समुंदर
की
ज़रूरत
क्या
है
हारना
है
तो
सिकंदर
की
ज़रूरत
क्या
है
Meem Alif Shaz
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तन्हाई
को
साथ
लिए
फिरते
हैं
हम
से
अकेला
रहना
नहीं
आता
है
Meem Alif Shaz
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हम
अपने
अंदर
का
खज़ाना
भूल
गए
फिर
ख़ुद
को
इंसान
बनाना
भूल
गए
Meem Alif Shaz
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