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Meem Alif Shaz
main agar bewafa hooñ bataa to sahi
main agar bewafa hooñ bataa to sahi | मैं अगर बे-वफ़ा हूँ बता तो सही
- Meem Alif Shaz
मैं
अगर
बे-वफ़ा
हूँ
बता
तो
सही
ज़ख़्म
कितने
दिए
हैं
दिखा
तो
सही
तेरे
बारे
में
गर
कुछ
ग़लत
बोला
है
मेरे
अल्फ़ाज़
मुझ
को
सुना
तो
सही
यह
हवा
कुछ
नहीं
है
धुआँ
ही
तो
है
तू
चराग़ों
को
फिर
से
जला
तो
सही
खोल
दूँगा
परों
को
मैं
बारिश
में
भी
ज़िन्दगी
मुझ
को
मंज़िल
दिखा
तो
सही
- Meem Alif Shaz
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उस
मेहरबाँ
नज़र
की
इनायत
का
शुक्रिया
तोहफ़ा
दिया
है
ईद
पे
हम
को
जुदाई
का
Unknown
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ईद
का
दिन
तो
है
मगर
'जाफ़र'
मैं
अकेले
तो
हँस
नहीं
सकता
Jaafar Sahni
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किसी
से
दूरी
बनाई
किसी
के
पास
रहे
हज़ार
कोशिशें
कर
लीं
मगर,
उदास
रहे
Sawan Shukla
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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सुब्ह
तक
हिज्र
में
क्या
जानिए
क्या
होता
है
शाम
ही
से
मिरे
क़ाबू
में
नहीं
दिल
मेरा
Jigar Moradabadi
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खुला
फ़रेब-ए-मोहब्बत
दिखाई
देता
है
अजब
कमाल
है
उस
बे-वफ़ा
के
लहजे
में
Iftikhar Arif
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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कभी
न
लौट
के
आया
वो
शख़्स,
कहता
था
ज़रा
सा
हिज्र
है
बस
सरसरी
बिछड़ना
है
Subhan Asad
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
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मैं
अपनी
तस्वीर
बनाऊँ
कैसे
तेरे
लिए
पत्थर
हो
जाऊँ
कैसे
Meem Alif Shaz
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बच्चे
कैसे
जाने
माँ
की
ख़िदमत
वो
तो
खोए
हैं
अपनी
ज़ीनत
में
Meem Alif Shaz
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मैं
तो
बादल
हूँ
मुझ
को
तो
बरसना
है
ज़मीं
की
तिश्नगी
देखी
नहीं
जाती
Meem Alif Shaz
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मैं
तेरी
यादों
के
हिसार
में
हूँ
यानी
मैं
तेरे
इंतिज़ार
में
हूँ
तुझ
को
लिखता
हूँ
तुझ
को
पढ़ता
हूँ
मैं
आज
कल
तेरे
इख़्तियार
में
हूँ
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Meem Alif Shaz
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अगर
मैं
ग़लत
हूँ
तो
मुझ
को
सज़ा
दो
या
फिर
मुझ
को
दिल
से
अभी
तुम
दु'आ
दो
दरख़्तों
ने
चुप
के
से
मुझ
से
कहा
है
हमारे
भी
ज़ख़्मों
पे
मरहम
लगा
दो
दिया
चाहता
है
अगर
ख़ूब
जलना
हवा
को
हटा
के
उसे
तुम
ख़ला
दो
जिधर
भी
ग़मों
की
हवा
सी
चली
है
उधर
तुम
भी
जा
के
सभी
को
दवा
दो
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Meem Alif Shaz
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