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Meem Alif Shaz
agar tum zulfen kholo shaam ho jaa.e
agar tum zulfen kholo shaam ho jaa.e | अगर तुम ज़ुल्फ़ें खोलो शाम हो जाए
- Meem Alif Shaz
अगर
तुम
ज़ुल्फ़ें
खोलो
शाम
हो
जाए
मिरे
दिल
के
लिए
इक
जाम
हो
जाए
चलो
पानी
पिलाएँगे
मुसाफिऱ
को
दु'आ
है
ख़ैर
यह
भी
आम
हो
जाए
ख़ुदा
का
शुक्र
है
दिल
में
रवानी
है
वगरना
साँस
ग़म
से
जाम
हो
जाए
अगर
ख़ैरात
निकले
सब
मकानों
से
गरीबों
का
भी
थोड़ा
काम
हो
जाए
- Meem Alif Shaz
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उम्र-ए-दराज़
माँग
के
लाई
थी
चार
दिन
दो
आरज़ू
में
कट
गए
दो
इंतिज़ार
में
Seemab Akbarabadi
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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जिसने
बेचैनियाँ
दी
हैं
मुझे
बेचैन
रहे
मैंने
रो-रो
के
ख़ुदास
ये
दु'आ
माँगी
है
Shajar Abbas
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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उस
से
मिले
ज़माना
हुआ
लेकिन
आज
भी
दिल
से
दु'आ
निकलती
है
ख़ुश
हो
जहाँ
भी
हो
Mohammad Alvi
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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तमाम
हैं
बिमारियाँ
मगर
तुम्हें
हुआ
है
इश्क़
तो
अब
तुम्हें
ज़रूरत-ए-दुआ
ही
है
दवा
नहीं
Hasan Raqim
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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माँ
की
करते
हुए
ख़िदमत
मुझे
आ
जाए
क़ज़ा
ऐ
ख़ुदा
एक
ये
बेटे
की
दु'आ
है
तुझ
सेे
''Akbar Rizvi"
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ज़माना
तो
बहुत
मसरूफ़
है
ऐ
दोस्त
ऐसा
कर
तिरी
बातों
को
मैं
सुन
लूँ
मिरी
बातों
को
तू
सुन
ले
Meem Alif Shaz
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जिस
को
तराशा
था
सालों
तक
मैंने
वो
बेटा
इक
काला
पथ्थर
निकला
Meem Alif Shaz
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इश्क़
में
हाथ
जल
ही
न
जाए
मैं
अगर
छूलूँ
तेरे
बदन
को
Meem Alif Shaz
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तू
मोहब्बत
से
मुझे
समझा
सँभल
सकता
हूँ
मैं
चाक
पर
रक्खा
हुआ
हूँ
फिर
से
ढल
सकता
हूँ
मैं
वैसे
तो
इक
फूल
हूँ
मुझ
से
मोहब्बत
कर
के
देख
ऐसे
तो
पत्थर
हूँ
नफ़रत
को
कुचल
सकता
हूँ
मैं
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Meem Alif Shaz
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तुझ
को
जाना
है
तो
जा
सकता
है
फिर
से
मेरे
दिल
को
दुखा
सकता
है
लेकिन
याद
रहे
जाने
से
पहले
दिल
में
कोई
और
भी
आ
सकता
है
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Meem Alif Shaz
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