din dhal chuka hai pyaas men hai raat samjhiye | दिन ढल चुका है प्यास में है रात समझिए

  - Janib Vishal
दिनढलचुकाहैप्यासमेंहैरातसमझिए
इकशे'रमेंहैलाखइशारातसमझिए
दोदिनभीनहींचलसकाइकइश्क़हमारा
दोदिनमेंदिखादीकिसीनेजातसमझिए
कोईछुएतोप्यारसेतोड़ेतोअदबसे
इकफूलकेनाज़ुकसेख़यालातसमझिए
मैंइश्क़मुहब्बतकोबुराक्याहीकहूँपर
गरएकतरफ़सेहैबुरीबातसमझिए
दिलपरचलाहुक्मतोछूरीचलाडाली
यानीकिगिरेकीगिरीऔक़ातसमझिए
क्याथाकिहुआक्याहैवजहकुछतोहै'जानिब'
बदलाहैअगरकोईतोहालातसमझिए
  - Janib Vishal
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